मेरठ । प्रदूषण की रोकथाम और ईधन की बचत के हिसाब से बसें सार्वजनिक परिवहन का सबसे मुफीद साधन हैं। बावजूद इसके इनकी संख्या आबादी के अनुपात में बेहद कम है। मेरठ में एक हजार की आबादी पर केवल 1.2 बसें हैं, जबकि दिल्ली में यह औसत 2.7 बसों का है। ग्लोबल औसत छह बसों का माना जाता है।

मेरठ जनपद की आबादी 36.50 लाख का आंकड़ा छू रही है। जनपद के परिवहन विभाग में 4400 बसें रजिस्टर्ड हैं। हालांकि राज्य परिवहन निगम के पास केवल 792 और सिटी ट्रांस्पोर्ट कारपोरेशन के पास 126 बसें हैं। आम दिनों में लोगों को बसों के इंतजार में घंटों इंतजार करते देखा जा सकता है। त्योहारों पर तो स्थिति और खराब हो जाती है। बसों की जबरदस्त मारामारी रहती है। दिल्ली में बसों की संख्या प्रति हजार मेरठ की तुलना में दुगनी है, जबकि वहां मेट्रो का आरामदायक परिवहन नेटवर्क मौजूद है। चंडीगढ़ में बसों की परिवहन व्यवस्था सबसे मुफीद मानी जाती है। वहां पर 4.7 बसें प्रति एक हजार व्यक्तियों पर हैं। थाईलैंड में यह आंकड़ा 8.6 बसों का है जो भारत के बड़े महानगरों के लिए एक मिसाल है।

टू-व्हीलर और अवैध थ्री-व्हीलरों का जमावड़ा

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में बसों खासकर सिटी बसों की संख्या काफी कम होने से मजबूरी में लोग निजी साधनों जैसे टू व्हीलर और आटो को प्रमुखता देते हैं, जबकि प्रति व्यक्ति एनर्जी कंज्यूम (ईंधन खर्च) को देखा जाए तो बस की तुलना में कार 1.6 गुना, टू व्हीलर 2.5 और थ्री व्हीलर 4.7 गुना एनर्जी कंज्यूम होती है। इससे वातावारण में प्रदूषण बढ़ता है।

कहां क्या स्थिति

जगह बसों की संख्या

थाईलैंड - 8.6

चंडीगढ़ - 4.7

दिल्ली - 2.7

कर्नाटक - 3.9

नोट : प्रत्येक जगह पर बसों की संख्या प्रति हजार में है।

----न्यूमेरिक्स----

मेरठ में बसों की स्थिति

4400 बसें मेरठ जनपद में चल रही हैं

4056 बसें डीजल चलित हैं

339 बसें सीएनजी व पेट्रोल से चलित है

792 बसें राज्य परिवहन निगम की चल रही हैं

122 सिटी बसें शहर में दौड़ रही हैं

300 बसें निजी परिवहन सेवा की हैं इसलिए है डग्गामार बस संचालकों की चांदी

रोडवेज द्वारा संचालित और परिवहन विभाग से अनुमति प्राप्त बसों की संख्या पर नजर डालें तो स्थिति और खराब है। दिल्ली के पास और एनसीआर का जनपद होने के बावजूद मेरठ में बसें काफी कम हैं। 10 हजार की आबादी के लिए केवल तीन बसें हैं। रोजाना हजारों लोगों का दिल्ली आवागमन होता है। नोएडा, बागपत, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, आगरा और सहारनपुर जनपदों में जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी है। ऐसे में यात्रियों को डग्गामार बसों सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इन्होंने कहा--

रिव्यु आफ द परफार्मेस आफ स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग की रिपोर्ट में बसों की संख्या में आबादी के अनुसार बढ़ोत्तरी न होने से चिंता जाहिर की गई है। प्रमुख शहरों में बसों के संख्या का तुलनात्मक आकलन किया गया है। मेरठ में यह 1.2 प्रति हजार के आसपास है अगर सिर्फ परिवहन निगम और अनुमति प्राप्त बसों को लिया जाए तो यह औसत काफी कम है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रति एक हजार की आबादी पर छह बसें होनी चाहिए।

दिनेश कुमार, एआरटीओ मेरठ

Posted By: Jagran