मेरठ, जेएनएन। ऑनलाइन ठगी करने वालों ने किसान के खाते से 70 हजार रुपये साफ कर दिए। पीड़ित को मामले की जानकारी तब हुई, जब वह अपने खाते से रुपये निकालने पहुंचा। हैरानी की बात तो यह है कि उसे मोबाइल पर रुपये निकलने का मैसेज भी नहीं मिला।

लोन के खाते से सेविंग अकाउंट में डाले थे

थाना भावनपुर के जिठोली गांव निवासी ग्राम प्रधान जीत पाल सिंह के छोटे भाई सूरज पाल किसान हैं। सूरज पाल का सिसौली स्थित एक बैंक में खाता है। सूरज ने बताया कि उसने बैंक से लोन ले रखा है। कुछ दिन पहले उसने लोन के खाते से एक लाख रुपये निकालकर अपने बचत खाते में जमा किए थे।

एंट्री कराने पर मिली जानकारी

60 हजार रुपये की उधारी चुकाने के लिए वह 18 जनवरी को रुपये निकालने बैंक पहुंचा। जब उसने खाते से रुपये निकालने से पहले पासबुक पर एंट्री कराई तो उसे सत्तर हजार रुपये निकाले जाने की जानकारी हुई। ठगी करने वालों ने दो बार पच्चीस हजार और एक बार बीस हजार रुपये खाते से साफ कर दिए। उसने मामले की जानकारी बैंक कर्मियों को दी। उन्होंने बताया कि खरीदारी करने में उसके रुपये निकले हैं। जबकि उसके द्वारा कोई खरीदारी नहीं की।

एनिमल केयर की साइट पर मोबाइल नंबर डालकर ठगी

एनिमल केयर सोसायटी की साइट पर साइबर ठगों ने अपना मोबाइल अपलोड कर दिया। कॉल करने पर पीड़ित से दस रुपये का फार्म भराया जाता है, जिसकी ऑनलाइन रकम खाते में डालने की बात कही जाती है। रकम खाते में डालने के लिए ग्राहक के ओटीपी की जानकारी कर पूरी रकम उड़ा ली जाती है। एनिमल केयर सोसायटी के उपसचिव अंशु माली ने बताया कि साइबर ठगों ने सोसायटी की साइट्स पर अपना मोबाइल नंबर अपलोड कर दिया। पशु पक्षियों के बीमार होने पर पीड़ित उक्त नंबर पर कॉल करते हैं, जिन्हें कहा जाता है कि साइट्स पर फार्म में अपना नाम पता भरें। एसपी क्राइम रामअर्ज ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

नौकरी लगवाने के नाम पर 1.90 लाख की ठगी

नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक से 2016 में 1.90 लाख रुपये लिए गए थे। नौकरी न लगने पर युवक ने अपने रुपये वापस मांगे। आरोप है कि अब उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही। सोमवार को युवक ने पुलिस कार्यालय में शिकायत सुन रहे एसपी क्राइम से शिकायत की। हापुड़ के थाना बहादुरगढ़ के गांव शेरपुर निवासी सुरेंद्र ने बताया 2016 में वह लिसाड़ी गेट थाना के जाकिर कॉलोनी निवासी एक युवक के संपर्क में आया। आरोप है कि उसने खुद को राजनीतिक पार्टी का नेता बता उसे विश्वास में लिया। पार्टी के कई लेटरपैड दिखाकर उससे 1.90 लाख रुपये ले लिए। कई महीनों बाद तक जब सुरेंद्र की नौकरी नही लगी तो उसने रुपये वापस मांगे। 

Posted By: Prem Bhatt

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