मेरठ। बीएसएनएल के मोबाइल उपभोक्ता लंबे समय से 2जी और 3जी सिग्नल के जाल में उलझे हुए थे। कभी 2जी सिग्नल बाधित तो कभी 3जी सिग्नल टावर बंद। नेटवर्क बार-बार बाधित होने से उपभोक्ता परेशान हैं। बीएसएनएल ने इसके निदान की तैयारी कर ली है।

अत्याधुनिक तकनीक की मदद से 2जी और 3जी के टावर का झंझट खत्म कर एक ही टावर से दोनों सिग्नल उपलब्ध कराये जाएंगे। टावरों को अपग्रेड करने का कार्य जून के प्रथम सप्ताह में शुरू हो जाएगा।

दो-दो टावर से परेशान उपभोक्ता और विभाग

बीएसएनएल मोबाइल की 3जी सेवा शुरू होने के बाद से ही विभागीय अधिकारी और उपभोक्ता दो सेवाएं एक साथ देने के फेर में उलझे हैं। 3जी और 2जी के लिए अलग अलग टावर लगाये गये हैं। कभी कोई बंद तो कभी कोई। इन हालात में उपभोक्ता की सेवाएं बाधित होती रहती हैं। 3जी सेवा का बिल देने वाले उपभोक्ताओं को 2जी सेवा मिलती है। वहीं दो दो टावर के संचालन में विभागीय अफसर हांफ रहे हैं। खर्च की मार अलग है।

अब एक टावर और 'जेडटीई' की तकनीक

उपभोक्ताओं की समस्या के समाधान के लिए बीएसएनएल ने बड़ा फैसला लिया है। जेडटीई कंपनी के अत्याधुनिक तकनीक वाले उपकरण टावरों पर लगेंगे। इनकी खास बात यह होगी कि एक ही टावर से 2जी और 3जी सेवा के सिग्नल उपलब्ध कराये जा सकेंगे।

दो महीने में पूरा होगा काम

दूरसंचार जिले की सीमा में मेरठ और बागपत जनपद शामिल हैं। इनमें बीएसएनएल के कुल 166 टावर लगे हैं। इन सभी को अपग्रेड करने का काम जून के प्रथम सप्ताह से ही शुरू होगा। इसे दो महीने में पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है।

अच्छी सेवा मिलेगी, खर्च घटेगा

अभी तक नोकिया और इरक्शन कंपनी के उपकरण बीएसएनएल टावर पर लगे थे। अब जेडटीई के अत्याधुनिक उपकरण लगाये जाएंगे। बीएसएनएल के महाप्रबंधक जी के द्विवेदी ने बताया कि इससे मोबाइल उपभोक्ताओं को अच्छी सेवा मिलेगी, वहीं विभाग का भी खर्च कम होगा। यह कार्य मई में ही शुरू होना था लेकिन जीएसटी आदि की बाधा आ गई। अब जून के प्रथम सप्ताह से शुरू कराकर इसे दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Posted By: Jagran