मेरठ, जागरण संवाददाता। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को एक बार फिर धार दिया जा रहा है। बेंच की मांग को लेकर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू से शनिवार को अधिवक्ताओं की मुलाकात भी होनी है। हालांकि पिछले करीब 35 साल से बेंच की मांग को लेकर आंदोलन हो रहा है, हर बुधवार और शनिवार को अधिवक्ता अपनी मांग को लेकर न्यायिक कार्य से विरत भी रहते हैं, चुनाव आने पर चर्चाएं भी खूब होती हैं लेकिन कुल जमा हासिल यह है कि पश्चिमी उप्र की इस अति महत्वपूर्ण जरूरत को धरातल पर आकार नहीं मिल सका। यहां बेंच की मांग सबसे पहले सन 1956 में उठी थी। लोगों की मुखर मांग है कि यह बेंच मेरठ में ही बने क्योंकि पश्चिमी उप्र का सबसे बड़ा जिला तो है ही मेरठ, इसका पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व भी है। यह प्रमुख औद्योगिक शहर है और यह सबसे पुरानी छावनियों में से एक है।

बार-बार हुई, मगर बनी नहीं बात

हाईकोर्ट बेंच की मांग सबसे पहले 1956 में नेशनल कांफ्रेंस के अधिवक्ताओं ने उठाई थी। इसके बाद प्रदेश में सन 1976 में नारायण दत्त तिवारी की सरकार थी और उन्होंने भी खंडपीठ की स्थापना का प्रस्ताव पारित किया था। इसके अलावा पश्मिम में बेंच की स्थापना को लेकर सन 1986 में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने भी संसद में मांग उठाई थी। इसी साल विधि मंत्री हंसराज भारद्वाज ने भी संसद में बेंच को लेकर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि हमारी सरकार सैद्धांतिक रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापना की जरूरत स्वीकार करती है। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी पश्चिम में बेंच की स्थापना के लिए जसवंत सिंह आयोग का गठन किया था। आयोग ने भी बेंच स्थापना को जरूरी माना था। जनता दल के शासन में रामनरेश यादव के अलावा बनारसी दास व मायावती ने भी अपने शासन के दौरान खंडपीठ की स्थापना की मांग का प्रस्ताव पारित किया और अपनी संस्तुति प्रदान कर केंद्र सरकार को भेजा था। इसके अलावा वर्तमान सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी हाईकोर्ट बेंच को लेकर संसद में अपनी बात रख चुके हैं। हालांकि परिणाम अभी शून्य है।

लाहौर पास, प्रयागराज दूर

मेरठ से प्रयागराज करीब 637 किमी दूर है जबकि पाकिस्तान का लाहौर सिर्फ 458 किमी। ऐसे ही पड़ोसी राज्यों के उच्च न्यायालय भी प्रयागराज से आधी दूरी पर ही हैं। इनमें दिल्ली, चंडीगढ़, नैनीताल, शिमला, जयपुर व ग्वालियर आदि की दूरी 350 किमी के भीतर ही है। मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री सचिन चौधरी बताते हैं कि मेरठ में बेंच मिल जाती है तो समय की बर्बादी और पैसे की बचत दोनों होगी।

हाईकोर्ट में पश्चिम के 7.50 लाख मुकदमे

हाईकोर्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों के सिविल व क्राइम के 7.50 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। हर माह बड़ी संख्या में पश्चिम के लोगों को प्रयागराज अपने मुकदमों की पैरवी के लिए चक्कर काटना पड़ता है।

22 जिलों को मिलता सस्ता न्याय

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों से 35 साल से ज्यादा समय से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठ रही है। बेंच की स्थापना से मेरठ, बिजनौर, गाजियाबाद, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, हापुड़, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, सहारनपुर, बुलंदशहर समेत पश्चिम के सभी जिलों की बड़ी आबादी को सुविधा होगी और सस्ता न्याय मिल सकेगा।

आज केंद्रीय विधि मंत्री से वार्ता करेंगे अधिवक्ता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू से शनिवार शाम अधिवक्ताओं के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात होनी है। जिला प्रशासन को प्रतिनिधिमंडल में शामिल अधिवक्ताओं की सूची उपलब्ध करा दी गई है। शनिवार शाम पांच बजे दिल्ली में विधि मंत्री से होने वाली मुलाकत के दौरान अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल में महावीर सिंह त्यागी चेयरमैन केंद्रीय संघर्ष समिति, नरेंद्र पाल सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता, सुमंत जैन अध्यक्ष मुजफ्फरनगर सिविल बार, आदेश श्रीवास्तव अध्यक्ष मुरादाबाद बार एसोसिएशन, मनोज भाटी अध्यक्ष नोएडा बार एसोसिएशन और मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री सचिन चौधरी शामिल हैं। डीएम के. बालाजी ने बताया कि विधि मंत्री से मुलाकात के लिए छह अधिवक्ताओं के नामों की सूची प्राप्त हो गई है।

यह है बेंच बनाने की प्रक्रिया

हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार उसे सहमति के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजती है। इस पर एक कोलेजन कमेटी अपनी रिपोर्ट लगाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्यवाही होती है। इसके अलावा केंद्र सरकार चाहे तो वह इस संबंध में एडवोकेट जनरल की विधिक राय लेकर संसद में बिल भी पारित करा सकती है ताकि खंडपीठ का गठन किया जा सके।

Edited By: Prem Dutt Bhatt