अमित तिवारी, मेरठ। दिल्ली की सत्ता को मजबूती देने और व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्व रखने वाला गंगा-जमुना का यह दोआब क्षेत्र अंग्रेजों को 1803 में मिला था। लसवारी युद्ध के बाद मराठाओं से हुई संधि के बाद राजा सिंधिया ने इस क्षेत्र को अंग्रेजों को सौंप दिया था। वर्ष 1806 में अंग्रेजों ने मेरठ फोर्ट की दीवार (अब मौजूद नहीं है) के निकट छावनी को बसाया था। मेरठ छावनी बंगाल आर्मी का हिस्सा थी जिसका प्रांत बंगाल प्रेसीडेंसी के साथ ही पूरा उत्तर भारत था। सामरिक तौर पर मेरठ कैंट दिल्ली के लिए मददगार साबित हुआ। साथ ही पहाड़ों पर गोरखा और पंजाब में सिखों की बढ़ने का रास्ता भी बना। कुछ ही सालों में मेरठ छावनी उत्तर भारत में महत्वपूर्ण ब्रिटिश मिलिट्री स्टेशन बना और भारतीय उप-महाद्वीप में सबसे बड़े मिलिट्री स्टेशन के तौर पर भूमिका निभाई। 1857 की क्रांति भी मेरठ में हुई जिसमें अंग्रेजों को काफी नुकसान हुआ था।

सात रेजिमेंटल सेंटर थे छावनी में

मेरठ छावनी में तैनात सैनिकों ने प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध के साथ ही बेल्जियम के वाइप्रस युद्ध, बर्मा ऑपरेशन, फ्रांस युद्ध और आजादी के बाद वर्ष 1965, वर्ष 1971, और कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई है। मेरठ छावनी में देश में सर्वाधिक सात रेजिमेंटल सेंटर थे। इनमें सिख, पंजाब, डोगरा, सिख लाइ, एएससी नॉर्थ, आरवीसी और मिलिट्री फार्म। वर्तमान में आरवीसी ही है। मिलिट्री फार्म को भी अब बंद किया जा रहा है। तकरीबन 3568.06 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेरठ छावनी को जमीन के हिसाब से तीन हिस्सों में बांटा गया है। वर्ष 1976 में पांच रेजिमेंटल सेंटर के जाने के बाद पाइन इंफेंट्री डिवीजन और चार्जिग रैम इंफेंट्री डिवीजन ने उनका स्थान लिया। इनके अलावा सूर्या इंजीनियर ब्रिगेड भी मेरठ छावनी में तैनात है।

आजादी के बाद बना पश्चिम यूपी सब-एरिया

अगस्त 1947 में आजादी मिलने के साथ ही यूपी एरिया के अंतर्गत मेरठ सब-एरिया को पश्चिम यूपी सब-एरिया के तौर पर स्थापित किया गया। पहले पश्चिम यूपी सब-एरिया कमांडर ब्रिगेडियर डी बार्कर बने। नवंबर 1947 में उन्होंने कमांडर का पदभार ब्रिगेडियर एसजे ग्रीन को दिया और दिसंबर में उन्होंने सब-एरिया कमांडर का पदभार महावीर चक्र से सम्मानित ब्रिगेडियर यदुनाथ को दिया। ब्रिगेडियर यदुनाथ को देश का पहला सब-एरिया कमांडर बनने का गौरव भी प्राप्त हुआ था।

पुराने एमएच में अब है एडम ब्लॉक

पहले सब-एरिया मुख्यालय वर्तमान में माल रोड पर भूतबंगला कहे जाने वाले भवन में था। वर्तमान पश्चिम यूपी सब-एरिया मुख्यालय का एडम ब्लॉक कभी मुख्य मिलिट्री अस्पताल का भवन हुआ करता था। स्टेशन हॉस्पिटल के तौर पर यही पर ब्रिटिश अफसरों व जवानों का इलाज हुआ करता था। इसे 1864 के बाद बनाया गया था। आजादी के बने पश्चिम यूपी सब-एरिया मुख्यालय को विस्तार देने के क्रम में मिलिट्री अस्पताल में वर्तमान मिलिट्री अस्पताल परिसर में लाया गया। उसके साथ ही कमांडर के लिए वर्तमान मुख्यालय परिसर बनाया गया जहां कमांडर व उनका पूरा स्टाफ बैठता है।

Posted By: Jagran