मेरठ, [अमित तिवारी]। Young Achievers उत्तर प्रदेश सरकार से खेल का सर्वोच्च सम्मान रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से पुरस्कृत होने के बाद वुशू की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी साक्षी जौहरी स्वयं को गौरवान्वित व खुशकिस्मत मानती हैं और यह भी कहती हैं कि अवार्ड मिलने के बाद एक खिलाड़ी के तौर पर उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। जिस तरह अपने सीनियर्स को देख कर एक दिन वह इस अवार्ड को पाने के लिए कड़ी मेहनत किया करती थी, ठीक उसी तरह अपने जूनियर्स के लिए भी वह अब एक नजीर बनना चाहती हैं। जिससे आने वाले खिलाड़ी भी कड़ी मेहनत से प्रदेश और फिर देश के लिए पदक जीतें और खेल के सम्मान के योग्य बने। राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक वुशू के ताऊलू इवेंट में तलवारबाजी में माहिर साक्षी ने हर प्रतिस्पर्धा को पार करते हुए पदक जीते हैं। मेरठ में बुढ़ाना गेट की रहने वाली साक्षी को इसी साल उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से नवाजा है।

प्रदेश स्तर पर हर बार स्वर्ण जीतकर आगे बढ़ी साक्षी

साक्षी ने 2008 में वुशू का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें युद्ध कला ने आकर्षित किया। तब से लेकर साल 2021 तक करीब 13 प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में लगातार हर बार हर साल स्वर्ण पदक जीतकर साक्षी ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में भी हर बार कोई न कोई पदक जीतकर लौटी और इसी तरह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक भी पहुंच गई। उन्हें तलवारबाजी का शौक है। तलवारबाजी से पहले उन्होंने लाठी चलाना सीखा। लाठी में हाथ जमाने के बाद तलवारबाजी शुरू की और बहुत जल्द उसमें भी निपुण हो गई। साक्षी ने वुशू की फाइट प्रतिस्पर्धा में भी रजत पदक जीता है लेकिन उनका सबसे पसंदीदा इवेंट तलवारबाजी ही है और वह उसी में देश के नाम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना चाहते हैं।

पिता की चोट देख जागा युद्ध कौशल का शौक

रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित होकर मेरठ लौटी साक्षी का सोमवार को परिवार व आसपास के लोगों ने ढोल नगाड़े के साथ स्वागत किया। साक्षी का कहना है की स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें अलग-अलग खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था लेकिन उनका मन केवल जूडो कराटे सीखने पर ही अटका हुआ था। इसका एक कारण यह था कि काफी छोटी उम्र में साक्षी के पिता के किसी से झगड़े के दौरान सिर पर गहरी चोट लग गई थी। काफी टांके आए थे और उसका असर साक्षी के मन पर भी पड़ा था। तभी से उन्होंने यह ठान ली उन्हें जूडो कराटे सीख कर मजबूत बनना है जिससे उन पर कोई हमला न कर सके। स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ने के दौरान आत्मरक्षा शिविर स्कूल में ही लगा। उसे देखने के बाद साक्षी को पता था कि वह यही सीखना चाहती हैं। उन्होंने अपना नाम बिना माता-पिता को बताए ही उसके लिए डाल दिया। स्कूल स्तरीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर आगे बढ़ी और प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में जाने से पहले परिजनों को अपनी योजना के बारे में बताया। उसके बाद पदक जीत दी गई और पीछे मुड़कर नहीं देखा।

राष्ट्रीय स्तर पर भी जीते हैं कई पदक

साक्षी जौहरी ने प्रदेश स्तर पर हर बार स्वर्ण पदक जीतने के बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी अपने लिए हर बार स्थान बनाया। उनकी पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2008 में लखनऊ में हुई थी। आठवीं सब जूनियर नेशनल वुशू चैंपियनशिप में साक्षी ने कांस्य पदक जीता था। इसके बाद साल 2010 में चेन्नई में आयोजित 10वें सब जूनियर नेशनल वुशू चैंपियनशिप में भी एक रजत पदक और एक कांस्य पदक लेकर लौटी थी। 2013 में 11वें जूनियर नेशनल चैंपियनशिप पटना में कांस्य पदक जीता। उसी साल मणिपुर में आयोजित 12वें जूनियर नेशनल वुशू चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया। 2015 में छत्तीसगढ़ में आयोजित 13वें जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद 2015 के 24वें और 25वें सीनियर नेशनल वुशू चैंपियनशिप चंडीगढ़ और 2017 के 26वें सीनियर नेशनल वुशू चैंपियनशिप शिलांग में कांस्य पदक जीता। साल 2018 में पांचवें फेडरेशन विश्व कप जालंधर पंजाब में भी हिस्सा लिया। कोई पदक नहीं जीत पाई पर प्रदर्शन को सराहना मिली। उसी साल शिलांग में 27वें सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में एक बार फिर कांस्य पदक जीता और साल 2019 में भी 28वें सीनियर नेशनल वुशू चैंपियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम करके लौटी।

अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी खूब चली तलवारबाजी

साक्षी ने साल 2015 में 34वें नेशनल गेम्स केरल में हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता बड़ी थी। प्रतिस्पर्धा भी बड़ी थी, लेकिन प्रदर्शन को खूब सहारा सराहना मिली। कोई पदक भले न मिला पर आत्मविश्वास बढ़ा कर आगे बढ़ीं। इसके बाद साल 2018 में अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा लेने का मौका मिला। बुलगरिया में आयोजित तीसरे वर्ल्ड ताईजीक्वान चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और देश का प्रतिनिधित्व किया। साल 2019 में ईरान में आयोजित थर्ड प्लेस इंटरनेशनल विश्व कप में एक स्वर्ण पदक और एक रजत पदक जीतकर लौटी। इसके बाद 2019 में ही चीन में आयोजित आठवें वर्ल्ड कुंगफू चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया और देश का प्रतिनिधित्व किया।

अब नाशनल व यूनिवर्सिटी गेम्स पर है फोकस

वर्तमान में साक्षी का पूरा फोकस अगली नेशनल प्रतियोगिता पर है, जो 26 मार्च से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में होने जा रही है। साक्षी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से ही बीपीएड की पढ़ाई कर रही हैं। और वहीं से प्रशिक्षण भी करती हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में ही 24 मार्च को वर्ल्ड यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के लिए भी ट्रायल होंगे। साक्षी का पूरा फोकस ट्रायल में जीतकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित होना है। उसके बाद राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी पदक जीतकर आगे की प्रतियोगिता में अपना जगह बनाना है।

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