मेरठ, जेएनएन। National Girls Day बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। अपनी मेहनत के बल पर वह दुनियाभर में अपने नाम का परचम लहरा रही हैं। समाज में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के पीछे सरकार का उद्देश्य लड़कियों के सम्मान और महत्व को बढ़ावा देना है। आइए इस विशेष दिन जनपद की कुछ ऐसी बेटियों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है...।

डिजाइनर ड्रेस की फोटोग्राफी ने दिलाई पहचान

न्यू मोहनपुरी निवासी श्वेतांगी गुप्ता ने फोटोग्राफी का कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में अपने लिए फैशन फोटोग्राफी को चुना। इसमें डिजाइनर ड्रेस की फोटोग्राफी की जाती है। 22 साल की श्वेतांगी ने बताया कि यह एक अलग क्षेत्र है और इसमें काम करना एक अलग अनुभव है। श्वेतांगी बताती हैं कि लाकडाउन के दौरान उन्होंने यू-टयूब चैनल 'डेट कंगारू पाउचÓ बनाया। जिसका उद्देश्य लोगों को लेटेस्ट फोटोग्राफी की जानकारी देना था। इस यू-ट्यूब चैनल पर डिजाइनिंग फोटोग्राफी के अलावा कैलीग्राफी और फोटोग्राफी की अन्य जानकारी उपलब्ध हैं। लोगों ने इस चैनल को काफी पसंद किया।

खुद का बिजनेस बढ़ाया, महिलाओं को रोजगार भी दे रहीं ययाति

मवाना रोड स्थित सलारपुर गांव की रहने वाली ययाति चौधरी ने विद्या नालेज पार्क से फैशन डिजाइनिंग की शिक्षा प्राप्त की। 23 साल की ययाति को बड़े शहर में जाकर नौकरी करने से बेहतर लगा कि वह गांव की महिलाओं को सिलाई के साथ फैंसी परिधानों की ट्रेनिंग दें। इसकी शुरुआत उन्होंने एक साल पहले की। आज लगभग सौ महिलाएं ययाति से ट्रेनिंग लेकर उनके साथ काम कर रही हैं। ययाति बताती हैं कि अब उन्होंने आनलाइन काम शुरू कर दिया है, जिससे काफी फायदा हुआ है। साथ ही महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।

बच्चों को गणित के साथ कंप्यूटर की शिक्षा दे रहीं चांदनी

मीनाक्षीपुरम निवासी चांदनी विष्ट ने मेरठ कालेज से कंप्यूटर साइंस में एमएससी की है। 24 वर्षीय चांदनी पिछले तीन साल से अम्हेड़ा गांव के बच्चों को न सिर्फ हिंदी, अंग्रेजी और गणित की शिक्षा दे रही हैं। बल्कि कंप्यूटर क्लास भी दे रही हैं। इससे गांव के बच्चों को बाहर नहीं जाना पड़ता। चांदनी बताती हैं कि गांव में माता-पिता शिक्षा के लिए अधिक जागरूक नहीं हैं। ऐसे में बच्चों का भविष्य खराब होता है। इसीलिए वह गांव के बच्चों को शिक्षित कर रही हैं।

महिलाएं ही संभालती हैं फार्म हाउस

सदर निवासी पायल अग्रवाल ने वर्ष 2016 में बीआइटी से बीटेक किया। इसके बाद वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त हो गईं। लेकिन जल्द ही उन्हें महसूस होने लगा कि उन्हें अपना ही कोई काम करना है। ऐसे में पायल ने केंचुआ खाद तैयार करने का निर्णय लिया। पायल दतावली गांव में फार्म हाउस पर न सिर्फ हर माह 60 से 70 टन खाद तैयार कर रही हैं, बल्कि उनके फार्म हाउस में 15 महिलाएं भी काम करती हैं। पायल बताती हैं कि उनके फार्म हाउस पर सिर्फ महिलाएं ही काम करती हैं, इससे उनका घर चलता है। आज उनकी बनाई खाद की मांग न सिर्फ उत्तर प्रदेश में बल्कि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल तक है। 

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