मेरठ, [अमित तिवारी]। एक धावक के लिए उसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी वह खुद होता है। हर दिन फर्राटा भरने के साथ वह अपने को ही हराने के लिए दम भरता है। पिछले दिन से अगले दिन का प्रदर्शन और अच्छा हो, इसकी हर संभव कोशिश भी करता है। ऐसे ही एक उभरते धावक मेरठ के हैं जो अपनी रफ्तार में थोड़ी और रफ्तार डालना चाहते हैं। मेरठ जिले के मवाना तहसील क्षेत्र में भैंसा गांव के रहने वाले अभिषेक चौधरी धावक मिल्खा सिंह को अपना आदर्श मानते हैं। उन्हीं की तरह दौड़ना ही अभिषेक का भी जीवन लक्ष्य है। 400 मीटर के राष्ट्रीय स्तर के धावक अभिषेक अपनी रफ्तार में दो और सेकंड का इजाफा करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। यह दो सेकंड ही उनका प्राथमिक लक्ष्य है, जिसे हासिल करने के बाद वह अपने अगले लक्ष्य को पा सकेंगे।

इस दो सेकंड से बदल जाएगा बहुत कुछ

अभिषेक चौधरी की 400 मीटर की दौड़ में बेस्ट टाइमिंग 49.01 सेकंड की है। वह इसे 47 सेकंड तक ले जाना चाहते हैं। 47 सेकंड पहुंचने पर वह अपने आदर्श मिल्खा सिंह के कुछ रिकॉर्ड भी तोड़ सकेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरते हुए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत कर सकेंगे। दो सेकेंड का लक्ष्य पूरा करने के पीछे अभिषेक का एक और लक्ष्य भी है। वह अंतरराष्ट्रीय खेलों व एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक प्राप्त करना चाहते हैं जिससे देश का और मेरठ का नाम रोशन कर सकें। इसके साथ ही 2021 में होने वाली ओलंपिक क्वालीफिकेशन प्रतियोगिता में भी उनका लक्ष्य ओलंपिक टिकट हासिल करना है। यह क्वालिफिकेशन प्रतियोगिता 10 मार्च से 12 मार्च तक एनआईएस पटियाला में आयोजित होगी। इसी के साथ ही ओलंपिक्स के पहले होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी इसी प्रतियोगिता से खिलाड़ियों को चयनित किया जाएगा। इसीलिए अभिषेक चौधरी ने दो सेकंड के लक्ष्य को प्राथमिक लक्ष्य बनाया है जिससे आगे आने वाले लक्ष्य को साधने में आसानी हो।

स्कूल में शुरू हुई भागदौड़ की कहानी

अभिषेक चौधरी गांव में पढ़ाई के दौरान ही दौड़ा करते थे। अभिषेक के पिता बल्लभ सिंह किसान हैं। पढ़ाई और दौड़ का अभ्यास करने के साथ ही अभिषेक पिता का हाथ भी बताया करते थे। उसी दौरान कोच गौरव त्यागी ने ग्रामीण क्षेत्रों में टैलेंट सर्च अभियान किया और साल 2016 में उनकी मुलाकात अभिषेक चौधरी से हुई। उस समय अभिषेक कक्षा 12वीं में पढ़ाई कर रहे थे। गौरव त्यागी के मार्गदर्शन में अभिषेक ने दौड़ का प्रशिक्षण शुरू किया और उनके प्रदर्शन में लगातार निखार आता गया। स्कूल की सभी प्रतियोगिताओं में वह पदक विजेता रहे। इसके बाद कॉलेज पहुंचे और वहां भी स्वर्ण पदक जीते। यूनिवर्सिटी की प्रतियोगिताओं में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर मेरठ का नाम रोशन किया। उनकी दौड़ हर बार निखरने के पीछे उनका स्वयं के साथ प्रतिस्पर्धा करना भी रहा, जिसके लिए वह अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ना ही नया लक्ष्य मानकर आगे बढ़ते थे।

दौड़ते गए और पदक जीते गए

अभिषेक चौधरी ने साल 2017 में ही राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और पहली प्रतियोगिता में ही कांस्य पदक अपने नाम किया। 2018 में प्रदेश स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त किया और कॉलेज स्तर पर रजत पदक प्राप्त किया था। इसके बाद ऑल इंडिया इंटरसिटी की एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। रिलायंस की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेकर रजत पदक जीते थे। यह प्रतियोगिता 2019 में हुई थी। 2019 के ही राष्ट्रीय गेम्स में बेस्ट आठ में जगह बनाने में सफल रहे। इसी दौरान उनकी बेस्ट टाइमिंग 49.01 हुई। 2020 में कोई प्रतियोगिता नहीं खेल सके और लॉकडाउन के दौरान भी गांव में रहते हुए अपना प्रशिक्षण निरंतर जारी रखा। 2021 की पहली प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता 11-12 जनवरी को मेरठ में हुई। इसमें अभिषेक चौधरी ने 400 मीटर में हिस्सा लिया और करीब 51 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्हें नेशनल का टिकट मिल गया है और वह नेशनल में हिस्सा लेने जाएंगे भी। लेकिन नेशनल में 400 की एंट्री स्टैंडर्ड 49 सेकंड से नीचे है। इसलिए अभिषेक अभिषेक अपनी रफ्तार को बढ़ाने में जुट गए हैं जिससे अपनी बेस्ट टाइमिंग में थोड़ा और इजाफा कर सकें। 

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