मेरठ, जेएनएन। यूं तो सुबह की हवा को प्राणवायु कहा जाता है, लेकिन मेरठ में सुबह के समय बहने वाली हवा अब खतरे के निशान को भी लांघने लगी है। सुबह नौ और 10 बजे दर्ज की गई हवा की गुणवत्ता ने चिंता खड़ी कर दी है। यहां पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर 400 के पार रहा। यह बेहद खराब से भी एक सीढ़ी ऊपर 'गंभीर' की श्रेणी में आता है।

मेरठ के तीनों स्थान गंगानगर, जयभीमनगर और पल्लवपुरम में लगाए गए प्रदूषण का स्तर मापने के लिए लगाए गए यंत्र ने शनिवार सुबह की हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बताई। जयभीमनगर में तो सुबह नौ बजे मुख्य अवयव पीएम 2.5 की गणना 467 पहुंच गई। पल्लवपुरम और गंगानगर में भी पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर 400 के पार ही दर्ज किया गया। हालांकि दिन में सूरज के सिर पर आने के बाद हालात कुछ सुधरे और दिनभर के वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआइ में भी सुधार हुआ। दो दिन पहले 359 तक पहुंचा मेरठ का एक्यूआइ शनिवार को 267 दर्ज किया गया। वहीं, मेरठ में नगर निगम प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जारी निर्देशों पर सख्ती से अमल कराने में सफल नहीं हो पा रहा है। शहर में सीवर लाइन के निर्माण से टूटी सड़कों पर भी धूल उड़ रही है।

इधर, मेरठ के पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर में प्रदूषण का स्तर शनिवार को बढ़ा और यह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित जिला बन गया। यहां पिछले 24 घंटे का औसत एक्यूआइ 341 दर्ज किया गया। पहले नंबर पर 348 एक्यूआइ के साथ कुरुक्षेत्र रहा। तीसरे नंबर पर 330 एक्यूआइ के साथ ग्रेटर नोएडा रहा।

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