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मेरठ, [अनुज शर्मा]। एक अगस्त से बिजली खरीद के नियम केंद्र सरकार ने बदल दिए हैं। अब पावर कारपोरेशन को बिजली खरीदने के लिए एडवांस भुगतान करना होगा। लेकिन भुगतान कहां से करेंगे? उपभोक्ता बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं। वसूली प्रमाण पत्रों पर जिला प्रशासन भी वसूली नहीं कर रहा है। कैश गैप के हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश में 966 करोड़ से ज्यादा बकाया है। आठ महीने में वसूली मात्र 5.77 फीसद ही की गई है। मेरठ में अभी पिछले साल की 2.44 लाख की वसूली बकाया है। इस साल की वसूली अभी जीरो है। जिससे नाराज मुख्य सचिव ने सभी डीएम को कड़ा पत्र लिखा है।
प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे
पावर कारपोरेशन उपभोक्ताओं को महीना बीतने के बाद बिल जारी करता है। जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय देता है। छोटे उपभोक्ता पर दो महीने के बकाया के बाद सख्ती की जाती है। कनेक्शन काट दिया जाता है। फिर भी पैसा जमा नहीं होता तो रिकवरी जिला प्रशासन के पास भेजी जाती है। लेकिन इन वसूली पत्रों पर प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
966 करोड़ बकाया, आठ महीने में वसूली मात्र 55 करोड़
प्रदेश के 75 में से अधिकांश जनपदों में वसूली प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई में जिला प्रशासन उदासीन हैं। मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारी को कड़ा पत्र भेजकर बताया है कि पिछले आठ महीने में मात्र 5.77 फीसद राशि की ही वसूली की गई है। मेरठ में तो अभी वर्तमान वित्तीय वर्ष की रिकवरी का नंबर नहीं आ पाया है। अभी पिछले साल का ही 2.44 लाख बकाया है। पश्चिमांचल के 14 जनपदों में से अधिकांश का ऐसा ही हाल है।
युद्धस्तर पर चलाएं वसूली अभियान
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि अंधेरा होने से बचाने के लिए बिजली बकाया वसूली के लिए
युद्धस्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है।
मुजफ्फरनगर और हापुड़ से सीख लें अफसर
लापरवाही के आरोपों के बीच मुजफ्फरनगर और हापुड़ ने वसूली का उदाहरण भी पेश किया है। मुजफ्फरनगर मे 301.16 लाख की मांग के सापेक्ष 553.78 लाख की वसूली की। जबकि हापुड़ ने 75.38 लाख के बकाया के सापेक्ष 108.48 लाख की वसूली की।
इन्‍होंने बताया
बिजली का बिल जमा न करने वाले उपभोक्ताओं से वसूली के लिए जिला प्रशासन की मदद ली जाती है लेकिन अभी तक बिजली अफसर और तहसील प्रशासन इन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे थे। मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिये हैं। हम खुद भी जिला प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं। उम्मीद है कि अब वसूली में इजाफा होगा।
-आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल

एडवांस पैसा देंगे तभी मिलेगी बिजली
मुख्य सचिव ने बताया है कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति की अवधि सरकार ने बढ़ा दी है। साथ ही बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में भी रिकार्ड वृद्धि हुई है। जिससे बिजली की मांग और खपत बेतहाशा बढ़ी है। इसके लिए अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है। विद्युत मंत्रलय भारत सरकार का आदेश है कि एक अगस्त से बिजली उत्पादक कंपनियों को अग्रिम भुगतान करना होगा। अन्यथा संबंधित वितरण कंपनी को बिजली नहीं मिलेगी। पावर एक्सचेंज से भी बिजली क्रय की अनुमति नहीं मिलेगी। जिसके चलते अंधेरा होना तय है।

Posted By: Taruna Tayal

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