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मेरठ, [जागरण स्‍पेशल]। आज से कुछ साल पहले तक चार्टर्ड एकाउंटेंट यानी सीए बनने की राह कठिन थी। यह कठिनाई सिलेबस और परीक्षा के पैटर्न को लेकर नहीं, बल्कि सबसे अधिक इसकी तैयारी को लेकर होती थी। सीए की तैयारी करने के लिए मेरठ के अधिकांश युवाओं को दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन अब मेरठ में रहकर छात्र-छात्रएं अपने सपने को सच कर रहे हैं। कुछ साल से सीए की तैयारी को लेकर स्थिति बदल रही है। पहले ही प्रयास में सीए बनीं मेरठ की मेघना नागर मेरठ से टॉपर लिस्ट में शामिल रहीं। अपनी सफलता और मेरठ में तैयारी को लेकर उन्होंने दैनिक जागरण के संवाददाता विवेक राव से विशेष बातचीत की। पेश हैं बातचीत के कुछ प्रमुख अंश...
आपको सीए बनने की प्रेरणा किससे मिली और कब से तैयारी को लेकर गंभीर हुईं?
मेरे पिता विपिन नागर और भाई विपुल दोनों सीए हैं। उन्हें देखकर मैंने भी सीए बनने का फैसला किया। सोफिया गल्र्स स्कूल में दसवीं पास होने के बाद मैंने 11वीं में कॉमर्स लिया। तभी से सीए का सिलेबस भी देखना शुरू कर दिया था।
आपने पहले प्रयास में दोनों ग्रुप क्वालीफाई किए, कैसे?
12वीं की परीक्षा वर्ष 2015 में पास की थी। वर्ष 2016 में सीए इंटरमीडिएट के दोनों ग्रुप को क्वालीफाई किया। फिर 2019 में सीए फाइनल क्वालीफाई किया। सीए फाइनल के पहले ग्रुप में 234 और दूसरे ग्रुप में 232 नंबर हासिल किए हैं। कुल 466 अंक आए। चार साल में सीए बन गई। यह सब रेगुलर स्टडी से हुआ। कोचिंग के साथ घर पर पूरे सिलेबस को फोकस करना जरूरी है। परीक्षा से पहले छह घंटे पढ़ना जरूरी है। परीक्षा के दौरान तो मैं 16 घंटे तक पढ़ती थी।
आपने सीए की तैयारी कहां से की, क्या मेरठ में पर्याप्त सुविधाएं हैं?
मेरी पूरी तैयारी मेरठ से हुई। 12वीं की पढ़ाई के बाद मैंने मंगल पांडे नगर स्थित सीए की सेटेलाइट क्लास अटेंड की। जिसमें दिल्ली के बेहतरीन शिक्षक पढ़ाते थे। लाइव क्लास होने से सारी तैयारी हो जाती थी। सेटेलाइट क्लास मेरठ के विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित हुई है। क्योंकि बगैर दिल्ली जाए हम इसके माध्यम से दिल्ली के शिक्षक से पढ़ लेते हैं। आज मैं कह सकती हूं कि सीए बनने के लिए दिल्ली की दौड़ लगाने की कोई जरूरत नहीं है।
मेरठ में सीए की तैयारी करने के दौरान कोई दिक्कत आई थी?
तैयारी को लेकर कोई दिक्कत नहीं हुई। कोचिंग में सेटेलाइट क्लास से जो प्रश्न नहीं आते थे। उसे हम आपस में ग्रुप बनाकर डिस्कस करते थे। फिर भी जो समझ में नहीं आता था। कोई भी दिक्कत होने पर फोन कर दिल्ली के शिक्षक से पूछकर दूर कर लेते थे। मेल करने पर भी तुरंत जवाब मिल जाता था।

आपने पुराने पैटर्न से सीए की परीक्षा दी थी या नए पैटर्न से, कौन-सा पैटर्न आसान लगा?
12वीं की पढ़ाई के साथ ही इकोनोमिक्स, बिजनेस स्टडीज, कॉमर्स, एकाउंट का काफी हिस्सा कवर हो गया था। लॉ एक नया सब्जेक्ट था, जिसे अलग से पढ़ना पड़ा। मैंने जब सीए की तैयारी शुरू की थी, उस समय पुराना पैटर्न खत्म होने वाला था। नए पैटर्न से तैयारी की। नए कोर्स में इंटरनेशनल टैक्सेशन को जोड़ा गया है। यह सबसे कठिन था, जिसे मैंने लिया था।
12वीं के बाद क्या आपने कोई अन्य कोर्स भी किया था, आगे क्या योजना है?
सीए की तैयारी के साथ मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रचार से बीकॉम भी किया है। सीए बनने के बाद अब द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के कैंपस प्लेसमेंट में अप्लाई करूंगी। कंपनी फाइनेंस ऑफिसर बनना है। मेरी इच्छा विदेश जाने की है, अमेरिका के लिए सीपीए का टेस्ट होता है, चार पेपर होते हैं, इसकी तैयारी भी करूंगी।
सीए के लिए कितने अवसर हैं, नए प्रतिभागियों के लिए संदेश?
अवसर बेशुमार हैं। जीएसटी, नोटबंदी जैसी सरकार की योजनाओं ने सीए के लिए अवसर बढ़ा दिए हैं। सीए अब ग्लैमर वाला प्रोफेशन बन गया है। नए प्रतिभागियों के लिए बस यही कहना है कि वह नियमित पढ़ाई करें, सभी सिलेबस पर फोकस रखें। टैक्स, एकाउंट के साथ लैंग्वेज पर पूरा कमांड करें। परीक्षा में प्रस्तुति बेहतर रखें।
प्रोफाइल
नाम   मेघना नागर
सीए फाइनल में प्राप्तांक  466/800
पिता विपिन नागर, सीए
मां मंजू नागर, गृहिणी
पता मंगल पांडे नगर
स्कूल सोफिया गल्र्स स्कूल
वर्ष 2013 में 10वीं 94 फीसद
वर्ष 2015 में 12वीं 96 फीसद

हम दिल्ली की लगाते थे दौड़
दिल्ली में कोचिंग की पहले से होती थी बुकिंग
जिस समय मैंने सीए की तैयारी शुरू की थी, मेरठ में कोचिंग की व्यवस्था नहीं थी। या तो दिल्ली जाना पड़ता था, या फिर यहीं पर कॉलेज के शिक्षकों के सहयोग से सेल्फ स्टडी करनी पड़ती थी। बुलंदशहर से बीएससी के बाद मैंने दिल्ली कोचिंग में प्रवेश लिया। सप्ताह में तीन दिन जाना पड़ता था। आज जैसी सेटेलाइट कोचिंग नहीं थी। दिल्ली में भी अलग- अलग विषय के लिए दो से तीन जगह कोचिंग करनी पड़ती थी। मेरठ से दिल्ली आने जाने में पूरा दिन लग जाता था। हालांकि उस समय आज जैसी जाम की स्थिति भी नहीं थी। दो घंटे में दिल्ली पहुंच जाता था। दिल्ली के कोचिंग सेंटर में काफी भीड़ होती थी। इसलिए जगह के लिए सितंबर का बैच शुरू होता था, तो मई में ही बुकिंग करानी पड़ती थी। फीस दस हजार रुपये थी। आज मेरठ में सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब तैयारी करना पहले से आसान है।
-सीए शरद गुप्ता, सीए- बैच 1997
दिल्ली में ही लग जाता था पूरा दिन

यूपी बोर्ड से 10वीं और 12वीं की थी। डीएन डिग्री कॉलेज से बीकॉम तक हंिदूी माध्यम से पढ़ाई की। सीए की पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी था। मेरठ में कोचिंग की कोई व्यवस्था नहीं थी। क्या करें, मजबूरी थी, दिल्ली जाने के लिए सुबह सुपरफास्ट ट्रेन पकड़ता था। दिल्ली में सीए की कोचिंग में पढ़ने के बाद पूरा दिन लगता था। सुबह दस बजे निकलने पर रात नौ बजे वापस मेरठ आता था। दिल्ली में इंग्लिश मीडियम की क्लास अच्छी होती थी। सीए के अच्छे टीचर थे। आज जिस तरह से मेरठ में सेटेलाइट कोचिंग चल रही है, उस समय ऐसी कोई व्यवस्था मेरठ में नहीं थी। दिल्ली में किसी सब्जेक्ट को कनाट प्लेस की कोचिंग में पढ़ना पड़ता था, तो किसी सब्जेक्ट को दूसरी कोचिंग में पढ़ना होता है। वहां एक्सपर्ट होते थे जो मदद करते थे। अब तो मेरठ के बच्चों के लिए मेरठ में हर सुविधा उपलब्ध है।
-सीए हिमांशु गुप्ता, सीए - बैच 1998 

Posted By: Taruna Tayal

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