यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 27, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'दो दशक में संस्कृत बनेगी वैश्विक भाषा'
मेरठ : सतयुग में ज्ञानशक्ति, त्रेता में मंत्रशक्ति, द्वापर में युद्धशक्ति, जबकि कलयुग में संघ को शक्

मेरठ : सतयुग में ज्ञानशक्ति, त्रेता में मंत्रशक्ति, द्वापर में युद्धशक्ति, जबकि कलयुग में संघ को शक्ति माना गया। उक्त बातें संघ के क्षेत्र प्रचारक अलोक कुमार ने संघ शिक्षा वर्ग प्रथम के समापन पर माधवकुंज में आयोजित कार्यक्रम में कही। दावा किया कि आगामी दो दशक में दुनिया का विज्ञान एवं तकनीक संस्कृत भाषा की मोहताज होगी। संघ कार्यकर्ताओं ने पथ संचलन भी किया।
क्षेत्र प्रचारक आलोक कुमार ने कहा कि पुरातात्विक प्रमाणों ने भारतीय सभ्यता को करीब आठ हजार वर्ष पुरानी माना है। गत बारह सौ वर्षो में तमाम हमले झेलने के बाद भी भारतीय संस्कृति नहीं मिटी। कहा कि संघ परिवार अब दस करोड़ की संख्या पार कर चुका है, जो 90 देशों में किसी न किसी रूप में कार्यरत है। दुनिया के तमाम देशों के लोग संस्कृत सीख रहे हैं। दुनिया की हर छठवीं पुस्तक में हिन्दू धर्म से जुड़ी कोई न कोई सामग्री अवश्य प्रकाशित होती है।
गुरुकुल प्रभात आश्रम के कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद ने कहा कि योग दिवस पर दुनिया के 193 देशों ने इसे अपनाया, जो मानव कल्याण की दिशा में बड़ा कदम है। बीस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में 334 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। समापन पर छात्रों ने सामूहिक संचलन, योग, दंड एवं आर्शल आर्ट का प्रदर्शन किया। क्षेत्रीय संघचालक दर्शनलाल अरोड़ा, प्रांत संघचालक सूर्यप्रकाश टांक, विभाग संघचालक जतन स्वरूप एवं वर्गाधिकारी सत्यवीर आदि मौजूद थे।
