जागरण संवाददाता, मऊ : जिला अस्पताल की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। हर दीवार पर साफ तौर पर दरारें देखी जा सकती हैं। ओपीडी के अनेक विभाग इन जर्जर दीवारों पर टिके कमरों में ही संचालित किए जा रहे हैं। जबकि कुछ विभाग तो ऐसे हैं कि उनको ट्रामा सेंटर में भेज दिया गया है।

जिला अस्पताल को इन दिनों बाहर से चमकाने का प्रयास किया जा रहा है। अच्छे मार्बल को तोड़कर नए मार्बल लगाने की तैयारी चल रही है। जबकि अस्पताल की भीतरी दीवारें पूरी तरह जर्जर हो गई हैं। कई कमरों की हालत तो यह है कि बगल के कमरे में देखने के लिए आपको खिड़की की भी आवश्यकता नहीं है। दीवारों में पड़ी मोटी दरारों से ही कमरों के दूसरी ओर देखा जा सकता है। एनसीडी के कमरे की हालत बेहद खराब है। बगल के कमरे में हड्डी एवं जोड़ रोग के चिकित्सक बैठते थे, उन्हें अब ट्रामा सेंटर में शिफ्ट किया गया है। उसके ठीक बगल वाला कमरा ईसीजी का है। सीटी स्कैन सेंटर का भी यही हाल है। सबसे बुरा हाल तो जनरल सर्जन और बाल रोग विशेषज्ञ के कमरे का है। इन दोनों कमरों में तो दीवारों के फटने के साथ ही छतों ने भी साथ छोड़ना शुरू कर दिया है। कमरे की एक तरफ की दीवार खिसक चुकी है, जबकि दूसरी तरफ की दीवार दरकने से मोटी दरार पड़ गई है।

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जर्जर स्थिति को लेकर शासन को पत्र लिखा जा चुका है। बजट आने पर मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।

-ब्रजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला चिकित्सालय मऊ।

Posted By: Jagran

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