जागरण संवाददाता, मऊ : पंचायत चुनाव के आहट के बीच जिला प्रशासन द्वारा जनपद में लागू किए गए क्लस्टर का अब विरोध शुरू हो गया है। जिला प्रशासन पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए प्रधान संघ ने शासन को पत्र लिखा है। संघ ने दो सप्ताह से ग्राम पंचायतों के खाता संचालन पर लगी रोक को तत्काल हटाने की मांग की है। इसको लेकर प्रधान संघ सात जुलाई को बैठक कर अगली रणनीति तय करेगा।

कोविड-19 महामारी के दौरान जिला प्रशासन ने 10 हजार की आबादी के मानक पर क्लस्टर 25 जुलाई को लागू कर दिया। इसके तहत पूरे जनपद में 159 सचिवों को क्लस्टर के तहत गांव आवंटित कर दिए गए। हालांकि जनपद में लागू क्लस्टर में तमाम अनियमिताएं भी हैं। कहीं 15 हजार की आबादी पर मनचाहे सचिव को क्लस्टर दिया गया, तो कहीं मात्र 4500 की आबादी पर। क्लस्टर लागू करने में भी जिला प्रशासन ने चहेतों को लाभ दिया। इन्हें चिह्नित बड़े-बड़े गांव आवंटित किए गए तो अन्य के साथ कोरमपूर्ति की गई। इसी बीच जिला प्रशासन ने जनपद के सभी 675 ग्राम पंचायतों के बैंक खाता संचालन पर रोक लगा दिया। इसके चलते पूर्व में ग्राम पंचायतों द्वारा कराए गए कामों के पेमेंट भी बाधित हो गए। लगभग 12 दिन से खाता बंद होने को लेकर ग्राम पंचायतों में आक्रोश फैल गया है। प्रत्येक ब्लाक के प्रधान संघ द्वारा मुख्य सचिव शासन को संबोधित पत्र भेजा जा रहा है। ग्राम प्रधानों ने एक स्वर में क्लस्टर को निरस्त करने की आवाज उठाई है।

जिला प्रशासन द्वारा जनपद में क्लस्टर को लागू करने का समय सही नहीं है। साथ ही इसमें तमाम गड़बड़ी भी है। कोविड-19 महामारी के दौरान ग्राम पंचायतें गांवों में छिड़काव आदि के काम कर रही हैं, तो वहीं सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण तेज है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा खातों पर रोक लगाने से विकास कार्य ठप हैं। सात जुलाई को प्रधान संघ की बैठक में रणनीति तय होगी।

- विवेकानंद यादव, अध्यक्ष पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन।

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