जागरण संवाददाता, मऊ : जनपद में विकास भवन की सहमति से बिना टेंडर पांच माह तक हुए अनियमित 16 करोड़ के भुगतान पर प्रशासन ने पूरी तरह से मौन साध लिया है। न तो अभी तक ब्लाकवार जांच ही कराई गई और नहीं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कोई एक्शन ही प्रशासन ले पाया। इधर मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को लेकर मुख्यमंत्री के ताप से बचने के लिए प्रशासन हर जतन करने लगा है। जहां रात तक लगातार बैठकों का दौर चल रहा है तो प्रशासन गांवों की खाक छान रहा है। इधर जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। प्रशासन के हर एक अनियमितता के दस्तावेज मुख्यमंत्री तक पहुंचाने में जुटे हैं।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में अप्रैल माह से अगस्त माह तक लगभग आधी ग्राम पंचायतों ने टेंडर छपवाए। इसके बाद गांवों में हैंडपंप रिबोर, लाइट आदि मद में भुगतान किए जाने लगे। इधर, विकास भवन ने ग्राम पंचायतों के अधिकारों पर हक जताते हुए छपे टेंडर को निरस्त कर दिया। इसके बाद भी प्रशासन ने टेंडर छपवाने की जहमत नहीं उठाई। वही जनपद के 531 गांवों में लगभग 16 करोड़ रुपये बिना टेंडर के भुगतान कर लिए गए। इसमें कुछ ग्राम पंचायतों ने बिना काम कराए ही भुगतान कर लिया। जब मामला उजागर हुआ तो प्रशासन ने आनन-फानन बड़रांव के तीन तथा रानीपुर के दो ग्राम पंचायतों की जांच कराई जहां अनियमितता भी मिली। बड़रांव में ग्राम सचिव को बर्खास्त किया गया तो रानीपुर में ग्रामनिधि में धनराशि वापस कराई गई। जनपद में बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर होने के एक पखवारे बाद भी विकास भवन इसमें संलिप्त अधिकारियों को बचा रहा है। उधर, जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को मुख्यमंत्री दरबार ले जाने का दावा किया है।

Edited By: Jagran