उत्तर प्रदेश के मऊ में टीचर के निधन पर फूट-फूटकर रोए छात्र, वीडियो देख आप भी हो जाएंगे भावुक
मऊ में प्रिय शिक्षक डॉ. रामविलास भारती की अंतिम यात्रा के दौरान छात्रों के आंसू देखकर उनकी असली कमाई का ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, मऊ। आखिर एक शिक्षक की कमाई क्या होती है इसे धन से आंकने से बेहतर उनके कृतित्व को उन छात्रों के आंखों में निहार सकते हैं जो उनके अंतिम यात्रा में बरबस ही छलक पड़ते हैं। शिक्षक और छात्र का स्नेह भरा संबंध जब टूटता है तो मानो आसमान फट पड़ता है। कुछ ऐसी ही तस्वीर मऊ की नजर आई जब उनके प्रिय शिक्षक की अंतिम यात्रा स्कूल के पास से भी गुजारी गई।
स्कूली बच्चियों की चीत्कार और रुंधे गले यह बताने के लिए काफी थे कि सिर से एक साया अब वह नहीं रहा जो गोविन्द तक पहुंचने का मार्ग बताया करता था। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जबकि जहां मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हुआ वहां भी चीत्कार करते बच्चे पहुंचे तो लोगों की पलकों के कोर गीले हो गए।
एक शिक्षक की असली कमाई उसके छात्रों के आंसुओं में छिपी होती है, जो उसकी अंतिम विदाई पर बहते हैं। मऊ में एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब एक प्रिय शिक्षक की अंतिम यात्रा उनके विद्यालय के सामने निकाली गई। छात्रों की चीत्कार और रुंधे गले यह दर्शाने के लिए काफी थे कि अब वह साया नहीं रहा, जो उन्हें ज्ञान की ओर ले जाता था। यह भावनात्मक क्षण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

घोसी क्षेत्र के माछिल निवासी, राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत शिक्षक, इतिहासविद और समाजसेवी डा. रामविलास भारती दिल्ली में 15 दिन की कार्यशाला में गये थे। वहां उन्हें रात में अटैक आया और उन्होंने दम तोड़ दिए। निधन होने पर शव यात्रा मंगलवार को निकली थी। इस दौरान विद्यालय की छात्राएं फफक पड़ीं और सभी की आंखें नम थीं। घोसी से दोहरीघाट मुक्तिधाम तक जनसैलाब उमड़ पड़ा। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा होती रही। जिले के सभी शिक्षक, पत्रकार, समाजसेवी और अधिवक्तागण भी इस अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
डा. रामविलास उच्च प्राथमिक विद्यालय रघौली के प्रधानाध्यापक थे। उन्होंने विद्यालय में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई थीं और अपने वेतन से विद्यालय की बगिया को इतना सुंदर बनाया था कि हर कोई वहां रुकने को मजबूर हो जाता था। उनके विद्यालय में हमेशा छात्रों की भीड़ लगी रहती थी। उन्हें शिक्षा जगत में एक मिसाल माना जाता था। छात्रों के बीच वह केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि बच्चों के नेचर टीचर के रूप में जाने जाते थे।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि एक शिक्षक की असली कमाई उसके छात्रों के दिलों में होती है। जब एक शिक्षक का जाना होता है, तो उसके छात्रों का दुख और आंसू उसकी शिक्षा और मार्गदर्शन की गहराई को दर्शाते हैं। डा. रामविलास भारती का योगदान न केवल उनके विद्यालय तक सीमित था, बल्कि उन्होंने समाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी शिक्षण शैली और छात्रों के प्रति स्नेह ने उन्हें एक आदर्श शिक्षक बना दिया। उनके निधन से न केवल उनके छात्रों को बल्कि पूरे समुदाय को गहरा सदमा लगा है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि शिक्षा का असली मूल्य क्या है। क्या यह केवल ज्ञान देने में है, या फिर छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में?
इस प्रकार की घटनाएं हमें यह याद दिलाती हैं कि शिक्षक केवल ज्ञान के स्रोत नहीं होते, बल्कि वे हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं। उनके द्वारा दी गई शिक्षा और संस्कार जीवनभर हमारे साथ रहते हैं। डा. रामविलास भारती का जीवन और कार्य प्रेरित करने वाला ही था यह बच्चों के आंसू बता रहे थे कि जीवन में वह आदर्श ही थे।
इस दुखद घटना ने यह भी दिखाया कि समाज में शिक्षकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। जब एक शिक्षक का योगदान समाज में इतना गहरा होता है, तो उनके जाने से जो शून्य उत्पन्न होता है, वह कभी भर नहीं सकता। डा. रामविलास भारती का जीवन और उनके कार्य हमें यह सिखाते हैं कि शिक्षा का असली अर्थ क्या है।
