जागरण संवाददाता, मऊ : उत्तर प्रदेश द्वारा भारत सरकार के कृषक जागरूकता अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को भारतीय बीज विज्ञान संस्थान में उर्वरकों का संतुलित उपयोग विषय पर आभासी माध्यम के द्वारा कृषक गोष्ठी की आयोजन किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से 50 से अधिक वैज्ञानिकों, तकनीशियन तथा किसानों ने भाग लिया। प्रभारी निदेशक डा. अरविद नाथ सिंह ने कृषि में उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा मृदा स्वास्थ के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने बताया कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता व इसके अंधाधुंध प्रयोग से हमारी मृदा का स्वास्थ ़खराब होने के साथ-साथ फसलोत्पादन अपेक्षा अनुरूप नहीं हो रहा है। अत: मृदा परीक्षण व फसलों के अनुसार सभी आवश्यक पोषक तत्वों को पोधों को देना चाहिए। कृषक गोष्ठी के दौरान तकनीकी सत्र का भी आयोजन किया गया था। इसमें संस्थान के वैज्ञानिकों ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा मृदा स्वास्थ से सम्बंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. गोविद पाल ने मृदा परीक्षण एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, डा. कल्याणी कुमारी, वैज्ञानिक ने फसल अवशेष प्रबंधन, डा. विशाल त्यागी, वैज्ञानिक ने उर्वरकों की फसलोत्पादन में भूमिका एवं संतुलित उपयोग तथा फर्टिगेशन, डा. गोपी किशन वैज्ञानिक ने वर्तमान कृषि में कार्बनिक खाद का महत्व विषयों पर व्याख्यान दिए इसके बाद कृषको के साथ परिचर्चा की गई। इसमें कृषकों के द्वारा खेती से जुड़े विभिन्न प्रश्न किए गए तथा संस्थान के वैज्ञानिकों के द्वारा उचित समाधान दिए गए अंत में संयोजक डा. विशाल त्यागी, वैज्ञानिक ने सभी कृषकों, वैज्ञानिकों, संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों एवं अन्य सम्मानित व्यक्तियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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