जागरण संवाददाता, मधुबन (मऊ) : वैसे तो समाज में काफी बदलाव आ रहा है। लोग जागरूक हो रहे हैं लेकिन हमारे देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां आज भी बेटियों को बेटों से कम आंका जाता है। बेटियों को पढ़ाने में लोग संकोच करते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि शार्ट फिल्म सोचो लोगों की सोच में बड़ा बदलाव लाने का कार्य करेगी। ये बातें उपजिलाधिकारी निरंकार ¨सह ने गुरुवार को कही। वह स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा दरगाह स्थित उस्मानिया अस्पताल के प्रांगण में आयोजित समारोह में बोल रहे थे। आइएमए अध्यक्ष डा. अनिल तिवारी ने कहा कि जब तक हमारी सोच में बदलाव नहीं होगा, समाज में फैली बुराइयों पर काबू पाना मुश्किल है। कार्यक्रम के संयोजक डा. राशिद उस्मानी ने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान सीओ श्वेता आशुतोष ओझा, हरिशचंद्र यादव, डा. नासिर अली, बृजेश जायसवाल, डा. कैलाश मौर्य, डा. अशोक प्रजापति, डा. जुबैर, प्रधान प्रशांत गुप्त, डा. झिन्नक, शाह आलम, वीरेंद्र भारती, पंकज चतुर्वेदी उपस्थित थे ।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस