जागरण संवाददाता, दोहरीघाट (मऊ) : नदी में हल्की सी बाढ़ आने पर ही खतरे की जद में आ चुके रामपुर-धनौली गांव को अब आगामी वर्ष में बाढ़ एवं जलप्लावन की समस्या के दंश से मुक्ति पाने की राह तनिक टेढ़ी हो गई है। शासन ने 1179 लाख की राशि का प्रस्ताव तो स्वीकृत किया पर ई-टेंडर नहीं खुल सका। अब अधिसूचना जारी होने से वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलेगी। दरअसल नदी में फोरलेन के लिए पुल निर्मित होने के बाद धारा सीधे इन दोनों गांवों की तरफ मुड़ गई है। नदी के वेग या जलस्तर में तनिक सी वृद्धि होते ही इन दोनों गांवों के तरफ किनारे पर नदी का दबाव बढ़ जाता है। इस वर्ष इन दोनों गांवों सहित समीपवर्ती गांवों में बाढ़ का तांडव ऐसा हुआ कि खाने को चावल के लाले पड़ गए। इस समस्या से मुक्ति के लिए सिचाई विभाग ने शासन को प्रस्ताव प्रेषित किया था। एक माह पूर्व ही शासन ने प्रस्ताव स्वीकृत किया। प्रस्ताव के अनुसार इन दोनों गांवों के समीप नदी के किनारे पर 350 मीटर की लंबाई में क्रेटेड स्टोन बोल्डर की छह दीवारें बनेंगी। प्रत्येक दीवार के बीच में एक मीटर की दूरी होगी। दो दीवारों के बीच खाली स्थान को विशेष विधि से पैक किया जाएगा। एक बोल्डर का वजन 25-50 किलोग्राम होगा। इस दीवार के निर्माण के बाद नदी की धारा दीवार से टकरा कर वापस हो जाएगी। इन गांवों के बचाव को प्रस्तावित परियोजना स्वीकृत होने के बाद शासन ने अधिसूचना लागू होने के एक माह के पूर्व ही सिचाई विभाग की 1179 लाख रुपये की लागत की प्रस्तावित परियोजना को स्वीकृति प्रदान किया। स्वीकृति मिलते ही विभाग ने ई-टेंडर प्रकाशित किया। टेंडर अभी स्वीकृत न होने से वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली। अब अधिसूचना जारी होने से वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल सकेगी। अलबत्ता पूर्व से धनौली एवं मुक्तिधाम के बीच नदी की धारा का मार्ग परिवर्तित करने को 21 ठोकरों के निर्माण का कार्य जारी रहेगा। बहरहाल यह तय है कि अधिसूचना समाप्त होने के बाद परियोजना के मूर्त रूप लेते ही बाढ़ से सुरक्षा की यह अभेद्य दीवार राहत प्रदान करेगी। ग्रामीण मारकंडेय राय, प्रबंधक धर्मेंद्र राय, विवेका राय, दीना राय, अरूण राय, विनोद राय एवं अनिल राय ने अधिसूचना समाप्त होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने और मानसून सत्र के पूर्व ही पूर्ण करने की मांग की है।

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इस कार्य की लागत अधिक होने से नियमानुसार उच्चाधिकरियों के स्तर से ई-टेंडर आनलाइन प्रकाशित किया गया। ई-टेंडर खुल न सका। इसके चलते वित्तीय स्वीकृति बाधित हो गई। अब अधिसूचना समाप्त होते ही अवशेष प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।

-वीरेंद्र पासवान, अधिशासी अभियंता सिचाई खंड।

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