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मऊ में सरयू ने अंचलों में बरपाया कहर, खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचा जलस्तर

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 01 Oct 2026 03:17 PM (IST)

मऊ के मधुबन देवारा क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है, ...और पढ़ें

HighLights

  1. सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 54 सेमी ऊपर।

  2. देवारा क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित।

  3. बाढ़ के कारण सात विद्यालय बंद, पशु चारे का संकट।

जागरण संवाददाता, मऊ। मधुबन देवारा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सरयू नदी ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर ली है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से देवारा क्षेत्र में दोबारा बाढ़ का संकट गहरा गया है। गुरुवार को हाहानाला पर सरयू नदी का जलस्तर खतरे के बिंदु 66.31 मीटर से 54 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया।

जलस्तर 66.85 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसके पूर्व 13 सितंबर को को हाहानाला पर सरयू नदी का जलस्तर 66.45 मीटर पर पहुंचने के बाद पानी घटने लगा था। इस बार क्षेत्र में दोबारा सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से चक्कीमुसाडोही समेत कई गांवों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। संपर्क मार्गों पर पानी भरने के साथ ही कई स्थानों पर आबादी में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।

चक्कीमुसाडोही में बाढ़ की स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। यहां आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। कंपोजिट विद्यालय परिसर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। ग्रामीणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें भी बाढ़ के कारण प्रभावित हो रही हैं।

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क्षेत्र के धर्मपुर विशुनपुर के विंदटोलिया, जरलहवा, कुड़िया, दुबारी के धूस, खैरा, बैरिकंटा, मनमनकापुरा, भेड़कुल सुल्तानपुर के चौहानपुर, बरोहा, नुरुल्लाहपुर, सिसवा बलुआ, लिलहवा और कचिला नरायनपुर समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों में मुख्य मार्गों पर पानी भर जाने के साथ ही कई जगह आबादी तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीणों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन अब नाव बन गई है।

बाढ़ के चलते सात विद्यालय बंद

देवारा क्षेत्र में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा चक्कीमुसाडोही, खैरा देवारा, विंदटोलिया, चौहानपुर समेत सात गांवों में स्थित विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। विद्यालय परिसरों में बाढ़ का पानी पहुंचने तथा बच्चों के आवागमन में खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इससे बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।

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पशुओं के हरे चारे का संकट, सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन
बाढ़ के कारण देवारा क्षेत्र में पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। खेतों और निचले इलाकों में पानी भर जाने से हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में पशुपालक अपने पशुओं को लेकर देवारा क्षेत्र से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। पशुओं को सुरक्षित रखने के साथ ही उनके चारे और पानी की व्यवस्था करना पशुपालकों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

धूस नई बस्ती के 13 परिवार राहत शिविर में पहुंचे
देवारा क्षेत्र स्थित धूस नई बस्ती में कटान पीड़ितों द्वारा बसाई गई रिहायशी मड़इयों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इसके चलते 13 परिवारों को एक पखवाड़े में दूसरी बार वहां से निकालकर मोलनापुर स्थित बाढ़ राहत शिविर में ठहराया गया है। प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ ही राहत व्यवस्था की निगरानी की जा रही है।

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आवागमन के लिए 25 नाव लगाई गईं
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए 25 नाव लगाई हैं। उपजिलाधिकारी दीपक सिंह ने बताया कि चक्कीमुसाडोही के साथ ही सुन्नरकापुरा, विष्णुकापुरा, बैरिकंटा, खैरा देवारा, कचिला नरायनपुर और नुरुल्लाहपुर में ग्रामीणों के आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव की व्यवस्था की जा रही है। बाढ़ चौकी के माध्यम से सरयू नदी के जलस्तर पर सतर्क दृष्टि रखी जा रही है।

24 घंटे बाद थम सकती है जलस्तर की वृद्धि

दोहरीघाट में सरयू नदी का जलस्तर स्थिर होने से प्रशासन को राहत की उम्मीद है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी 24 घंटे में देवारा क्षेत्र में सरयू के बढ़ते जलस्तर पर भी विराम लग सकता है। इसके बाद शुक्रवार से जलस्तर में कमी शुरू होने की संभावना है।