जागरण संवाददाता, मऊ : दैनिक जागरण द्वारा मनरेगा में अनियमितता का मामला उजागर करने के बाद शासन ने इसे गंभीरता से संज्ञान में लिया है। खबरें राजधानी तक पहुंचने के बाद प्रमुख सचिव शासन के तेवर तल्ख हो गए। मंगलवार को प्रमुख सचिव ने मनरेगा के तहत श्रम व सामग्री मद में बीते पांच वर्षों में कराए गए भुगतान की रिपोर्ट तलब कर ली है। प्रमुख सचिव द्वारा पूरे मामले को तलब किए जाने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। जनपद में 'टॉप टू बॉटम' कागजों को सहेजने की कार्यवाही युद्धस्तर पर शुरू हो गई।

कोविड-19 के दौर में गरीबों व प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देना शासन की प्राथमिकता है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके निर्देश दे चुके हैं। इसके बजाय जब जनपद में कोरोना पीक पर था तो जिम्मेदार अधिकारी मैटेरियल मद की धनराशि प्राइवेट फर्मों के खाते में धड़ाधड़ भुगतान करने में जुटे रहे। बीते वित्तीय वर्ष 2019-20 तथा वर्तमान 2020-21 का लगभग 45 करोड़ रुपये धड़ल्ले से पेमेंट कर दिया गया। इसमें जहां अधिकतर राशि पुराने कामों के नाम पर उतरी तो करोड़ों रुपये इस वित्तीय वर्ष के भी रहे। जब मनरेगा के धन की गरीबों को आवश्यकता थी, उस दौरान प्राइवेट फर्मों पर लुटाई गई मेहरबानी का मुद्दा दैनिक जागरण ने उठाया। अंतत: चार-पांच दिन चली मनरेगा सीरीज को शासन ने संज्ञान में ले ही लिया। मंगलवार को प्रमुख सचिव ने मामले में जिला प्रशासन से 2017-18, 18-19, 19-20 तथा 2020-21 में श्रम व सामग्री मद में किए गए भुगतान की रिपोर्ट तलब की है। मनरेगा में अनियमितता का मामला शासन के संज्ञान में आते ही जिला मुख्यालय से ब्लाक मुख्यालयों तक हड़कंप मच गया। बुधवार को कागजों को सहेजने की कार्यवाही चलती रही।

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वर्जन

पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। इसके लिए टीमें गठित की गई हैं। यदि वास्तव में कहीं कोई गड़बड़ी मिली तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख सचिव ने रिपोर्ट तलब की है। उसे तैयार कर भेजा जा रहा है।

-रामसिंह वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी, मऊ।

Posted By: Jagran

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