जागरण संवाददाता, मऊ : पूर्व केंद्रीय मंत्री व विकास पुरुष कल्पनाथ राय ने हर क्षेत्र में जनपद का विकास तो किया ही साथ ही साथ यहां के किसानों को समृद्धशाली बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी की स्थापना भी करवाई। यहां से हर साल हजारों किसान प्रशिक्षण लेकर आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं। कृषि के अलावा यह केंद्र मुर्गी पालन व मछली पालन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। हर साल सैकड़ों किसान प्रशिक्षण लेकर नए सिरे से अपनी खेती व व्यवसाय अपना कर रोजगार पा रहे हैं। यही नहीं वैज्ञानिक अत्याधुनिक खेती करवाकर किसानों का भरपूर सहयोग कर रहे हैं। इससे किसानों की कमाई दिन दूना रात चौगुना के तर्ज पर हो रही है।

कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना 1989 में की गई। यह ऐसी संस्थाएं हैं जो किसानों के लिए प्रशिक्षण से लेकर विभिन्न कृषि उत्पादन प्रणाली के अंतर्गत नई तकनीक, बीज एवं रोपण सामग्री को किसानों के खेत पर परीक्षण आदि करने तक के कार्य करता हैं। साथ ही आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी में किसानों के ज्ञान व कौशल को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर विभिन्न गतिविधियों किसान मेला, कृषि प्रदर्शनी, प्रौद्योगिकी सप्ताह, मीटिग, समूह चर्चा और सेमिनार आदि का आयोजन कर रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एलसी वर्मा के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र, सिर्फ कृषि के क्षेत्र में काम कर रहा है। यहां कृषि विज्ञान, उद्यान, पशुपालन, मछली पालन, कृषि इंजीनियरिग, पौध सुरक्षा, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और गृह विज्ञान के विशेषज्ञ एक समूह के रूप में कार्य करते है। महिलाओं की समस्याओं को और पोषण से संबंधित समस्याओं पर सुझाव दिया जा रहा है।

परिस्थितियों के अनुरुप दिया जाता है तकनीकी ज्ञान

जिले की परिस्थितियों के अनुरूप जिस तकनीक की जरूरत है, उसका ज्ञान कृषि विज्ञान केंद्र को रहता है। यानी यहां की जमीन कैसी है, वहां की जलवायु कैसी है, सिचाई के साधन कितने हैं और उन परिस्थिति के हिसाब से वहां पर क्या नई तकनीक होनी चाहिए। इसके अलावा, बहुतायत मात्रा में बीज चाहे वे फसलों के हों, दलहन के हों, धान, गेहूं के हों या सब्जियों के हों उपलब्ध रहते हैं। साथ ही खेतों में यदि कोई बीमारी है तो उसके लिए विशेषज्ञ उपलब्ध कराते हैं।

मुर्गी पालन में है महारथ हासिल

कृषि विज्ञान केंद्र ने मुर्गीपालन व मशरूम उत्पादन में महारथ हासिल कर ली है। इसे देखने के लिए दूसरे जिलों के भी किसान आते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र में छह ही विशेषज्ञ हैं। कुछ गांवों का चुनाव कर यह प्रदर्शन करते हैं। इसके बाद तकनीक से संबंधित कोई संदेश या प्रशिक्षण देना है, तो उसके लिए जिले के सभी किसान केंद्र पर आते हैं। हालांकि, कृषि विज्ञान केंद्र सभी विषयों पर काम करता है।

Edited By: Jagran