जागरण संवाददाता, मधुबन (मऊ) : फतहपुर मंडाव विकास खंड क्षेत्र में केवल दो ग्राम पंचायतों में मात्र 15 आवासों की जांच में चार लोग अपात्र मिले। इन अपात्रों को मोटी धनराशि के बदले इनाम दिया गया है। विकास खंड में गरीबों के लिए बन रहे प्रधानमंत्री आवास प्लस में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता की पोल अब खुलने लगी है। दो एडीओ की गठित जांच टीमों के समक्ष यह मामले सामने आए हैं। ऐसे में पूरे विकास खंड क्षेत्र में दिए गए 1002 आवास की मानक अनुरूप जांच हुई तो सैकड़ों की तादाद में अपात्र मिलेंगे।

प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आवास प्लस के लिए बीते कई माह से गरीब व असहाय पात्रों के चयन का काम किया जा रहा था। इसमें प्रत्येक ग्राम पंचायतों से सैकड़ों पात्र-अपात्र लोगों ने आवेदन किया था। आवेदन के साथ ही आवास के लिए ग्राम पंचायतों में मोलभाव भी शुरू हो गया था। इसका नतीजा यह निकला कि जब आवास देने का समय आया तो इसमें जांचोंपरांत केवल 1002 लोगों के ही खाते में प्रथम किस्त के रूप में 40 हजार रुपये प्रेषित किया गया। इसमें भी बड़े पैमाने पर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में अपात्रों को आवास दे दिया गया और दिव्यांग, विधवा और वास्तविक पात्रों को वंचित कर दिया गया। गांव-गांव से आवास को लेकर अपात्रता और अवैध वसूली की शिकायत प्रकाश में आने पर जागरण ने खबर प्रकाशित किया था। वहीं भाजपा के जिला महामंत्री राधेश्याम सिंह ने शासन के साथ ही जनपद के उच्चाधिकारियों के यहां शिकायत दर्ज कराते हुए जांच की मांग की थी। इस पर आनन-फानन खंड विकास कार्यालय ने एडीओ कृषि राकेश पांडेय व एडीओ कोआपरेटिव सुनील यादव के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच की जिम्मेदारी सौंप दी। कमेटी को पहले दिन परशुपुर और सिंहासन गांव की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितता मिली। परशुपुर में चार लाभार्थियों में एक अपात्र मिला है, वहीं सिंहासन में 11 लाभार्थियों में तीन अपात्र मिले। इसमें भी एक लाभार्थी ऐसा है जिसके आवास का पैसा दूसरे के खाते में भेज दिया गया है। हालांकि अभी यह सिर्फ दो ग्राम पंचायतों में आवास के चयन का यह हाल है, तो शेष ग्राम पंचायतों में आवास के लिए लाभार्थियों के चयन में कितनी पारदर्शिता बरती गई है इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

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आनन-फानन खातों पर लगा रहे रोक

फतहपुर मंडाव में आवास की दो एडीओ के कमेटी की जांच में अपात्रों का मामला सामने आने के बाद आनन-फानन विकास खंड ने अपात्रों का पता लगाकर उसके खाते पर रोक लगाने की कवायद कर रहा है। हालांकि कि लाभार्थी ऐसे हैं जो खाते से पैसा निकालकर निर्माण शुरू भी कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि आवास की जांच कहा तक पहुंचती है और अपात्रों का चयन करने वालों पर कार्रवाई कब तक होती है।

Edited By: Jagran