जागरण संवाददाता, मऊ : साल दर साल स्वच्छता के कार्यक्रम चलते रहे। केंद्र में कोई भी सरकार रही हो सभी का फोकस स्वच्छता पर रहा है। पहले भी प्रत्येक वर्ष हजारों की तादात में शौचालय निर्माण का लक्ष्य आता रहा। ग्राम पंचायतों को मोटी धनराशि जाती रही। हां यह अलग बात है कि शौचालय धरातल पर उतरे कि नहीं, यह किसी को नहीं पता। प्रशासन प्रत्येक वर्ष फीडिग करता रहा। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को मिशन का रूप दिया तो प्रत्येक शौचालयों की मॉनिटरिग होने लगी। इसमें जनपद की सैकड़ों ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनके खातों में लाखों का ब्याज पड़ा है। आज तक ग्राम पंचायतों ने ब्याज वापस नहीं किया।

केंद्र की पूर्व संप्रग सरकार ने निर्मल भारत अभियान चलाया था। इसमें 4600 रुपये अभियान का, 4500 रुपये मनरेगा से तथा लाभार्थी को 900 रुपये लगाकर शौचालय निर्माण कराना था। ग्राम पंचायतों के खाते में निर्माण भारत अभियान की धनराशि डाल दी गई। इसका आलम यह रहा कि कुछ ग्राम पंचायतों में तो शौचालय बने और कुछ ग्राम पंचायतों ने पैसा उतार लिया पर धरातल पर शौचालय नहीं बने। वहीं अधिकतर ग्राम पंचायतें ऐसी भी रही जिनके खाते में निर्माण भारत अभियान की मोटी धनराशि कई वर्ष तक पड़ी रही। इसी दौरान 2014 में केंद्र में आई मोदी सरकार ने निर्मल भारत अभियान की जगह स्वच्छ भारत मिशन को शुरू किया। दो अक्टूबर से यह मिशन भी शुरू हो गया। इसमें भी मिशन की मोटी धनराशि ग्राम पंचायतों के खाते में भेजी गई। इसमें दर्जनों की तादात में ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां कई वर्ष से शौचालय का पैसा पड़ा है। इधर खाते में मोटी धनराशि होने के चलते बैंक का ब्याज भी बढ़ता गया। जब ग्राम पंचायतों का लेखा-जोखा आनलाइन होने लगा तो इसका भान हुआ। लाखों का ब्याज होने के बावजूद ग्राम पंचायतें विभाग को नहीं लौटा रही हैं। इनसेट--

200 शौचालय का पैसा डंप, सचिव के पर कतरे गए

विकास खंड परदहां की हरपुर ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के लगभग 200 शौचालयों की धनराशि डंप पड़ी हुई है। यहां ग्राम प्रधान व सचिव की उदासीनता तथा खंड विकास अधिकारी की कमजोर मॉनीटरिग के चलते यह शौचालय धरातल पर नहीं उतर पाए। जब विभाग ने मॉनीटरिग शुरू की तो यह मामला प्रकाश में आया। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम प्रधान व सचिव को नोटिस जारी की है। इधर खंड विकास कार्यालय द्वारा ग्राम सचिव के पर कतराते हुए उसके पास से पांच गांवों का अधिकार छीन लिया गया है। वर्जन--

ग्राम पंचायतों में स्वच्छता मिशन व इसके पूर्व के शौचालयों की धनराशि भेजी गई है। कई माह तक धनराशि पड़ी रह जाने के कारण इस पर बैंक का ब्याज भी बढ़ता है। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने खातों का संपूर्ण विवरण उपलब्ध कराएं। जिन ग्राम पंचायतों में ज्यादा दिनों से धनराशि डंप होगी और ब्याज ज्यादा होगा, ऐसी ग्राम पंचायतों पर कार्रवाई निश्चित होगी।

- संजय मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी, मऊ।

Posted By: Jagran

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