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राज्य कर विभाग का नोटिस पहुंचने पर पता चला क‍ि जीएसटी पंजीकरण के नाम पर हो गई धोखाधड़ी, पांच पर मुकदमा

By Jaiprakash Nishad Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 05 Sep 2026 04:03 PM (IST)

मऊ में एक युवक को रोजगार के बहाने फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया। ...और पढ़ें

मऊ में फर्जी जीएसटी पंजीकरण से करोड़ों की धोखाधड़ी पांच पर केस दर्ज।

मऊ में फर्जी जीएसटी पंजीकरण से करोड़ों की धोखाधड़ी पांच पर केस दर्ज।

HighLights

  1. युवक को रोजगार के नाम पर फंसाया गया।

  2. फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराकर करोड़ों की धोखाधड़ी।

  3. पुलिस ने पांच आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया।

जागरण संवाददाता, मऊ। दोहरीघाट थाना क्षेत्र के गोंठा गांव निवासी युवक को रोजगार दिलाने के नाम पर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। जालसाजों ने पीड़ित के जीएसटी पोर्टल का यूजर आइडी, पासवर्ड, ईमेल आइडी और मोबाइल नंबर का पूरा एक्सेस अपने पास लेकर उसकी फर्म के नाम पर फर्जी बिलिंग एवं इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का दावा किया। मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने पांच आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

गोंठा निवासी रुद्र कुमार का आरोप है कि अत्यधिक कर्ज होने के कारण वह नौकरी की तलाश में राजस्थान गया था। वहां उसकी मुलाकात जोधपुर निवासी समीर से हुई। समीर ने रोजगार दिलाने के नाम पर उसे पटना भेज दिया। पटना में उसकी मुलाकात सिवान निवासी अमित कुमार और नोएडा निवासी गौरव से हुई। दोनों उसे दिल्ली ले गए।

यहां उसकी मुलाकात नवी मुंबई निवासी आर्यन देशमुख, भोपाल निवासी कुलदीप खटीक और विनय ठाकुर से हुई। आरोप है कि सभी ने रुद्र को झांसे में लेकर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराने और कंस्ट्रक्शन कार्यालय खोलने के लिए तैयार किया। इसके बाद उसने अमित कुमार के साथ मिलकर फर्जी फर्म का पंजीकरण कराया। इसके लिए घोसी कोतवाली क्षेत्र में हाजीपुर पिढ़वल मोड़ के पास किराए पर दुकान भी ली गई। पीड़ित ने बताया कि आरोपितों ने जीएसटी पोर्टल से संबंधित उसकी सभी गोपनीय जानकारी और एक्सेस अपने पास ले लिया।

करोड़ों का फर्जी आइटीसी घोटाला और नोटिस

दुकान खुलने के बाद तीन-चार महीने तक वहां कोई काम नहीं हुआ। रुद्र ने जब इस संबंध में पूछताछ की तो कुलदीप खटीक के कहने पर कार्यालय बंद करा दिया गया और उसे दूसरा काम तलाशने की सलाह दी गई। इसके बाद गत 25 जुलाई को राज्य कर विभाग का नोटिस मिलने पर उसके होश उड़ गए। विभागीय जांच में उसकी फर्म के नाम पर 1 करोड़ 52 लाख 54 हजार 238 रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट दर्शाया गया था। इस पर उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई।

पीड़ित ने खटखटाया न्यायालय का दरवाजा

धोखाधड़ी का शिकार हुए रुद्र ने न्यायालय पहुंच गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद दोहरीघाट पुलिस ने आर्यन देशमुख, समीर, अमित कुमार, कुलदीप खटीक और विनय ठाकुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपितों तक पहुंचने के लिए उनके पते और अन्य उपलब्ध विवरणों की जांच कर रही है।