जागरण संवाददाता, मऊ : पति एवं संतान सुख, समृद्धि तथा अखंड सुहाग की कामना लिए बुधवार को महिलाओं ने हरितालिका तीज का कठोर एवं अखंड निर्जला व्रत शुरू किया। हाथों में मेंहदी रचाकर सुहाग के समस्त संसाधन एकत्र कर सुहागिनों ने एक दिन पूर्व ही सारी तैयारियां पूरी कर ली थीं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया को सूर्योदय के पूर्व ही ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नानादि से निवृत्त होकर जो जल ग्रहण किया तो फिर 24 घंटों के लिए सब कुछ पूर्णतया वर्जित कर व्रत की शुरुआत की।

नगर हो या गांव प्रत्येक क्षेत्र में सनातन धर्मावलंबी प्रत्येक वर्ग की महिलाओं ने इस व्रत को धारण कर निज सुहाग के लिए मां पार्वती व शिव की सविधि पूजा-अर्चना किया। इसके चलते विभिन्न मंदिरों में भी व्रतियों की काफी भीड़ रही। सायंकाल एक बार पुन: स्नानादि से शुद्ध हो प्रदोष काल में सौभाग्यवतियों ने अपने हाथों से मिट्टी का पार्थिव शिव¨लग व मां गौरी की प्रतिमा बनाकर, सोलह श्रृंगार कर सविधि उसका पूजन अर्चन किया। गुरुवार को सूर्योदय के पश्चात व्रत का पारण होगा। व्रती महिलाओं ने पूजन-अर्चन के बाद दान-दक्षिणा भी दिया। शाम को विभिन्न मंदिरों में आयोजित कथा में कहा गया कि शिव-गौरी की पूजा अर्चना से नारी को अखंड सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पति को परमेश्वर के रूप में पूजने वाली समर्पण, त्याग व ममता की प्रतीक भारतीय नारी उनके कल्याण व दीर्घायु की कामना लेकर सोलह श्रृंगार कर भाद्रपद शुक्ला पक्ष की तृतीया को अखंड निराजल व्रत रखती हैं। भारतीय नारी के पतिव्रत का यह पर्व संपूर्ण विश्व को चमत्कृत करता है।

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