जागरण संवाददाता, दोहरीघाट (मऊ) : पूर्वांचल के किसानों के लिए वरदान साबित होने वाली पंप नहर दोहरीघाट सिचाई विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते किसानों के लिए बेकाम साबित हो रहा है। नहर में पंप हाउस के ठीक सामने लंबे अरसे से मिट्टी का सिल्ट भरा हुआ है। प्रतिवर्ष नवंबर में नहर एवं नदी में पंप हाउस के सामने जमी सिल्ट की सफाई होती है। इस बार दिसंबर में भी कार्य प्रारंभ न हो सका है। जबकि लाखों की लागत का ड्रेजर सिल्ट हटाने के लिए वहां लगा हुआ है।

पूर्वांचल के किसानों की दशा सुधारने के लिए प्रथम पंचवर्षीय योजना के 1952 में पंडित अलगू राय शास्त्री के प्रयास से तत्कालीन सिचाई मंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी ने साधन विहीन किसानों को दोहरीघाट पंप कैनाल के रूप में सिचाई का उत्तम साधन दिया। 660 क्यूसेक क्षमता वाली पंप कैनाल से मऊ और बलिया जनपद के किसान इसका लाभ उठाते रहे हैं। वर्तमान समय में पंप नहर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है। पंप हाउस के सामने बने चैनल में भारी सिल्ट जमा है। इसके चलते आधी क्षमता में भी पंप कैनाल पानी नहीं उगल पा रहा है। इसको समय से पहले हटाया नहीं गया तो पंप तक नदी का पानी ही नहीं पहुंच सकेगा। नदी तल से चैनल सिल्ट से पट गया है। दूसरा चैनल बनाने को सिचाई विभाग को भगीरथ प्रयास करना होगा। मौके पर वास्तविक जानकारी देने को कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं है। नहर से 350 किलोमीटर के किसानों को सिचाई की सुविधा प्राप्त होती है। इन किसानों के खेतों की सिचाई के लिए 55 माइनर हैं। सिचाई विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते पंप नहर का अस्तित्व संकट में है। एक बड़ी विडंबना यह है कि नदी में जमा सिल्ट एवं बालू की सफाई के लिए यहां पर लाखों की लागत का ड्रेजर भी उपलब्ध है। यह ड्रेजर इन दिनों धूल फांक रहा है।

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सरयू नदी में इस बार ज्यादा शिल्ट होने से अभी उसकी सफाई नहीं हुई है जबकि टेंडर हो गया है। 15 दिसंबर तक नहर चलने की संभावना है। इधर नहर के पोर्च भी पूरी तरह से जर्जर हैं, अभी मोटर पंप की भी सफाई चल रही है। ड्रेजर मशीन से शिल्ट की सफाई कर पंप कैनाल तक नदी का पानी लाने के लिए जल्द ही कार्य को गति दी जाएगी।

- विरेंद्र पासवान, अधिशासी अभियंता, सिचाई मऊ।

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