जागरण संवाददाता, मऊ : जिले में उत्तर प्रदेश शासन के प्रतिनिधि के तौर पर महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों के आदेश-निर्देश भी शिक्षा माफियाओं के आगे नतमस्तक होते नजर आने लगे हैं। बीते सात जनवरी को जिलाधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी के निर्देश पर डीआइओएस डा.राजेंद्र प्रसाद एवं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी लालमन ने कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के सभी माध्यमिक इंटर कालेजों, डिग्री कालेजों तथा मदरसों की मान्यता, नियुक्त शिक्षकों की योग्यता एवं नियुक्ति पत्र सहित जिस जमीन पर संस्था के भवन हैं उसके दस्तावेजों की प्रमाणित छाया प्रति की फाइल मांगी थी। बावजूद इसके मुठ्ठी भर कालेजों, माध्यमिक विद्यालयों एवं मदरसों ने ही कलेक्ट्रेट सभागार तक अपने दस्तावेज पहुंचाएं हैं, शेष खामोश हैं। कहने को तो जिले में 150 से अधिक डिग्री कालेज हैं लेकिन सिर्फ आठ ने ही अपनी मान्यता और शिक्षकों के संदर्भ में दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं।

विधान परिषद निर्वाचन-2020 के मद्देनजर जिलाधिकारी ने डिग्री कालेजों, इंटर कालेजों तथा मदरसों से विद्यालय के भू-अभिलेखों, विद्यालय में सक्षम स्तर से अनुमोदित शिक्षकों की योग्यताओं-अर्हताओंकी प्रमाणित छायाप्रति तथा छह वर्ष से अधिक समय से कार्यरत होने की दशा में कम से कम तीन वर्ष की जीपीएफ-ईपीएफ की कटौती का प्रमाण पत्र मांगा था। दस्तावेजों को फाइल रूप में तैयार कर सात जनवरी की शाम पांच बजे तक कलेक्ट्रेट सभागार में उपलब्ध कराना था। इसकी सूचना आदेश प्रति एवं विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए सभी इंटर, कालेजों एवं डिग्री कालेजों तक पहुंचाई गई थी। जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद एवं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी लालमन ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में खुलासा किया है कि केवल 08 महाविद्यालयों, 41 एडेड इंटर कालेजों, 09 वित्तविहीन इंटर कालेजों एवं 10 मदरसों ने ही कलेक्ट्रेट सभागार में वांछित दस्तावेजों की फाइल उपलब्ध कराया है। शेष ने पूरे आदेश-निर्देश पर चुप्पी साध रखी है।

Posted By: Jagran

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