जागरण संवाददाता, घोसी (मऊ) : घोसी से लगभग छह किलोमीटर पश्चिम पकड़ी गांव में स्थित नईन मां के मंदिर की मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने सुधि ली है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी को मंदिर के कायाकल्प करने का निर्देश दिया है। जल्द ही यह मंदिर पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दिखेगा। इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना व समृद्ध है। नईन मां भारतीय इतिहास में विशिष्ट गौरव प्राप्त परमार वंश के बेहद प्रसिद्ध राजा भोज की कुलदेवी हैं। पकड़ी बुजुर्ग के राजपूत राजा भोज के वंशज हैं। त्रेता युग में वशिष्ठ मुनि की गाय नंदिनी को विश्वामित्र ने छल से अपहृत कर लिया। क्रोधित होकर मुनि ने मंत्रोच्चार करते हुए अग्निकुंड में आहुति डाला। कुंड से एक वीर पुरूष निकला। इस वीर पुरूष ने विश्वमित्र के यहां से नंदिनी को वापस लाकर वशिष्ठ मुनि को सौंप दिया था।

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अलाउद्दीन खिलजी ने किया कब्जा

वर्ष 1305 में मध्य भारत पर अलाउद्दीन खिलजी ने कब्जा किया। इन लोगों ने मां नैना देवी की प्रतिमा का पूजन कर थोड़ी सी मिट्टी पोटली में लिया और भटकते हुए पकड़ी के इस ताल तक आ पहुंचे। ताल के किनारे मां की मिट्टी से प्रतिमा बनाया और आबाद हो गए।

------------------- पकड़ी स्थिति नईन मां मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सुंदरीकरण के लिए मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग को निर्देशित किया है। पर्यटन विभाग के अनुरोध पर उक्त स्थल की पैमाइश की जाएगी।

--उमेश कुमार सिंह, तहसीलदार घोसी मऊ

Edited By: Jagran