जासं, घोसी (मऊ) : बीते दो वर्ष से जिले के गोंड समुदाय की जातिगत श्रेणी को लेकर उठा सवाल अभी तक अनुत्तरित है। इस समुदाय के अमिला निवासी युवक ज्ञानचंद गोंड ने इस समुदाय की जाति का प्रकरण हल न होने तक पुलिस एवं शिक्षक भर्ती पर रोक लगाए जाने की गुहार लगाया है। उन्होंने 17 दिसंबर को इस मामले को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना एवं उपवास की चेतावनी दी है। अदालत से लेकर प्रदेश सरकारों एवं प्रशासन के अस्पष्ट आदेश के भंवर में फंसे इस समुदाय के नेता स्वयं को अनुसूचित जनजाति में शुमार किए जाने का दावा करते हैं जबकि प्रशासन ने पूर्व में निर्गत जनजाति के प्रमाणपत्रों को आनलाइन निरस्त कर दिया है। प्रशासन इनको गोंड की बजाय कहार के रूप में चिह्नित कर पिछ़ड़ा वर्ग श्रेणी की मान्यता देकर जाति प्रमाणपत्र निर्गत करने को तैयार है। एक बार पिछड़ा वर्ग में शुमार होने पर दोबारा अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र के लिए दावा कमजोर होने के भय से यह वर्ग इस श्रेणी के जाति प्रमाण प्रत्र से दूरी बनाए हुए है।

Edited By: Jagran