जागरण संवाददाता, मऊ : नगर स्थित राजीव गांधी महिला पीजी कालेज परदहां में मंगलवार को डा. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय की प्रासंगिकता विषयक दो दिवसीय गोष्ठी का शुभारंभ किया गया। प्रथम दिन इक्कीसवीं शताब्दी में डा. भीमराव अंबेडकर के योगदान पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहब को एक जाति-धर्म एवं समाज से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके लेख एवं भाषण भारतीय सामाजिक ¨चतन के इतिहास और विकास के कालजयी दस्तावेज है। जाति प्रथा के उन्मूलन में उनका भारी योगदान रहा है।

पूर्वांचल विश्विविद्यालय जौनपुर के पूर्व रासेयो कार्यक्रम समन्वयक डा. मुहम्मद हसीन खान ने कहा कि महात्मा गांधी ने 300 वर्ष पूर्व की व्यवस्था देने यानि अंग्रेजों से देश को आजाद कराने के लिए लड़ाई लड़ी ¨कतु अंबेडकर जी ने 500 वर्ष की व्यवस्था को तोड़ने का कार्य किया। मौलिक अधिकार में समानता और बंधुत्व का श्रेय डा. अंबेडकर को जाता है। अंबेडकर एक ऐसे फूल हैं जो पूरे विश्व को महका रहे हैं। समाज शास्त्र की छात्रा नम्रता शर्मा व बीएड की छात्रा कीर्ति ¨सह ने भी अंबेडकर के सामाजिक न्याय के संदर्भ में विचार दिए। डा. अजय मिश्रा एवं महाविद्यालय की प्रबंधक राना खातून तथा कार्यक्रम की संयोजिका डा. रेखा दूबे ने अंबेडकर के सामाजिक न्याय आज के परिपेक्ष्य में कितने प्रासंगिक है। इस पर विस्तार से प्रकाश डाला।

Posted By: Jagran

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