जागरण संवाददाता, घोसी (मऊ) : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पहल पर प्रशासन हरकत में आया और बोझी क्षेत्र के सोंहण स्थित ईंट भट्ठे से एक दर्जन आदिवासी श्रमिक मुक्त करा लिए गए। ये मजदूर वहां चार माह से रह रहे थे। प्रशासन का निर्देश मिलते ही कोतवाली पुलिस ने सोमवार को बोझी क्षेत्र के सोंहण में संचालित ईंट-भट्ठे पहुंच गई। समाचार दिए जाने तक श्रमिक कोतवाली में सामान लेकर बैठे रहे।

छत्तीसगढ़ प्रांत के जांजगीर चांपा जिले के बगहिन और मुरलीडीह आदि गांवों के शंकर, दिनकर, तामेश्वर पाटले, सेवक लहरे, राकेश, मालिकराम, निर्मला, संगीता एवं तनुजा लहरे आदि तमाम श्रमिक एजेंट (मेठ) लाल के माध्यम से लगभग चार माह पूर्व अमिला निवासी भट्ठा मालिक जय¨हद गुप्ता के भट्ठे पर सोंहण पहुंचे। भट्ठा स्वामी ने एजेंट को लगभग दस लाख रुपया दिया। कुछ दिन बाद कुछ श्रमिक भाग गए और एजेंट का भी पता न लगा। भट्ठा श्रमिक शेष बची छह महिला एवं छह पुरुष श्रमिकों को अरदब में लेते हुए अघोषित रूप से बंधक बना लिया। एक श्रमिक ने किसी तरह छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का मोबाइल नंबर प्राप्त कर लिया और सोमवार की सुबह ही मोबाइल पर ही उन्हें बंधक बनाए जाने की सूचना दी। पूर्व सीएम श्री जोगी ने जिला प्रशासन को इस प्रकरण से अवगत कराया। बहरहाल दोपहर बाद भट्ठे पर पहुंचे बोझी चौकी प्रभारी चंद्रभान ¨सह ने श्रमिकों से पूछताछ किया। श्रमिकों ने भट्ठा पर न रहने और घर वापस जाने की बात कही। उपनिरीक्षक के समक्ष पहुंचे भट्ठा स्वामी ने बंधक बनाए जाने के आरोप से इंकार करते हुए श्रमिकों से इसकी तस्दीक कराया। भट्ठा स्वामी ने पुलिस के समक्ष इनका हिसाब कर मजदूरी चुकता होने का दावा किया। उधर श्रमिक घर जाने की जिद पर अड़े रहे। बहरहाल शाम को सभी श्रमिक सामान लेकर पुलिस संग कोतवाली पहुंचे। श्रमिकों ने किसी प्रकार की कार्रवाई से इंकार करते हुए देर शाम को प्रस्थान करने की जानकारी दी।

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बंधक बनाए जाने की सूचना गलत

उपनिरीक्षक चंद्रभान ¨सह एवं भट्ठा स्वामी जय¨हद गुप्त ने बंधक बनाए जाने की बात से इंकार किया है। अलबत्ता श्रमिकों द्वारा घर जाने की जिद पर अड़े होने की बात कही। उधर श्रमिकों ने मीडिया के समक्ष गाली गुप्ता दिए जाने का आरोप लगाया।

Posted By: Jagran

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