जागरण संवाददाता, मथुरा: टेंडर के फेर में शहरवासियों की प्यास बढ़ गई है। नगर निगम के जलकल विभाग पर पाइप नहीं हैं। दो बार टेंडर की प्रक्रिया कराई गई, पर पाइप तय कीमत पर ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं हो रहे हैं। इसलिए टीले की बस्तियों में नई पाइप लाइन बिछाने का कार्य नहीं हो पा रहा है। चार-पांच दशक पुरानी पाइप लाइन से पानी का रिसाव होने से मकानों में दरार पड़ रही हैं। पर्याप्त पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

शहर के चौबियापाड़ा में ताजपुरा, हनुमानगली, कोयला गली, फूलगली, पीरपंच, तुलसी चबूतरा, महाविद्या गली, घाटी बहालराय, शीतला पाइसा, चौक बाजार और लाल दरवाजा क्षेत्र की कई बस्तियां ऊंचे टीले पर बसी हैं। इनमें तमाम संकरी गलियां हैं। इन क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई चार-पांच दशक पुरानी अंडरग्राउंड पाइप लाइन से हो रही है, जो 14 इंच व्यास की है। अधिकांश पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है। पार्षद नीलम गोयल और रामदास चतुर्वेदी ने बताया, पुरानी पाइप लाइन से पानी का रिसाव होने से टीले पर मकान फटने की समस्या बनी हुई हैं। कई गलियां तो ऐसी हैं, जिनमें खोदाई नहीं कराई जा सकती है। खोदाई कराने से मकानों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। इसलिए संकरी गलियों में खुली पाइप लाइन डालने की योजना करीब एक साल पहले बनाई गई थी। गताश्रम टीला, ककोरन घाटी समेत कई गलियों में पाइप लाइन डाली गई, पर अधिकांश गलियां अभी बाकी हैं। इनमें खुली पाइप लाइन डालने को नगर निगम के जलकल विभाग पर दो से चार इंच व्यास के पाइप नहीं हैं। पाइप के लिए दो बार टेंडर की प्रक्रिया कराई गई, लेकिन तय रेट पर ठेकेदार टेंडर नहीं डाल रहे हैं। इसमें वे घाटा बता रहे हैं। इसलिए संकरी गलियों में पाइप लाइन डालने का काम नहीं पा रहा है। पुरानी पाइप लाइन से पर्याप्त मात्रा में पेयजल नहीं मिल पा रहा है। समस्या के निस्तारण को नगर आयुक्त अनुनय झा ने मार्केट रेट दर निर्धारित करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जलकल विभाग के महाप्रबंधक विजय नारायण मौर्य ने बताया, अपर नगर आयुक्त, जलकल महाप्रबंधक और लेखाधिकारी को कमेटी में शामिल किया गया है। जल्द पाइप के मार्केट रेट निर्धारित कर टेंडर प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

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