मथुरा, जासं। सपा, बसपा और रालोद महागठबंधन भाजपा पर हमलावर होने के लिए प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह की डाइनिग टेबल से लेकर पार्टी कार्यालय तक रणनीतिकार जुटे हुए हैं। हालांकि सोशल मीडिया का मैनेजमेंट अभी दूसरे दलों से कमजोर ही पड़ रहा है।

डेपियर स्थित आवास पर बुधवार को दोपहर में दो गाड़ियां बाहर खड़ी थी, जबकि आवास के सामने टेंट में पड़ी चालीस पचास कुर्सियों पर दो चार समर्थक बैठे हुए थे। अंदर एक कमरे में युवा की टीम के सदस्य कंप्यूटर खोल कर फेसबुक पेज, आइडी, इस्टाग्राम पेज और आइडी पर प्रत्याशी के कार्यक्रम और उनकी पोस्ट को अपलोड करने में तल्लीन थे। अंदर की बैठक में एक युवक मोबाइल पर व्यस्त था, जबकि अंदर डाइनिग टेबल पर जवाहर सिंह और गिर्राज सिंह फरह और मांट में प्रचार की रणनीति बनाने में लगे हुए थे। कुछ देर बाद ही कुंवर नरेंद्र सिंह भी अंदर आए और कुछ निर्देश देकर चले गए। पत्‍‌नी अर्चना सिंह रसोई में व्यस्त थी, जबकि पुत्रवधू सुबह ही प्रचार के लिए जा चुकी थीं। जो भी रसोई तक पहुंच रहा था, पत्‍‌नी उनसे चाय नाश्ता की पूछ रही थी। गणेशरा मार्ग स्थित रालोद पार्टी कार्यालय का नजारा कुछ अलहदा ही था। कुर्सियां समेट कर रख दी गई थी। अंदर कंप्यूटर पर बैठे वसीम चुनाव प्रचार के लिए गई गाड़ियों की लोकेशन ले रहे थे और उनमें प्रचार के लिए गए कार्यकर्ताओं की भी जानकारी कर रहे थे। एक कक्ष में बाराबंकी के पूर्व विधायक रालोद के राष्ट्रीय महासचिव शिवकरन सिंह अकेले बैठे थे। एक मोबाइल को उठाते, जब तक दूसरे की घंटी बजने लगती। वे बखूबी चुनावी व्यवस्था संभाले हुए थे। कार्यकर्ता और समर्थकों की मिल रही छोटी मोटी शिकायतों का भी हाथों हाथ निस्तारण कर रहे थे। कुछ समय बाद उनका हाथ बांटने के लिए ओमप्रकाश चौटाला भी कार्यालय पहुंच गए थे। पूर्व विधायक ने बताया कि टिकट की घोषणा देरी से हुई थी, इसलिए व्यवस्था को टेक अप करने में देरी हुई है। प्रचार का मैनेजमेंट संभालने के लिए ब्लॉक स्तर पर चुनावी कार्यालय खोल दिए गए हैं और एक गाड़ी को पांच गांवों में प्रचार के लिए लगाया गया है।

Posted By: Jagran

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