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संत प्रेमानंद की दीक्षा का बढ़ेगा इंतजार, अभी तक दो साल में होती थी पूरी अवधि, अब कठिन होगी परीक्षा

By Vipin Parashar Edited By: Prateek Gupta
Published: Sat, 03 Oct 2026 11:59 PM (IST)

संत प्रेमानंद के आश्रम में दीक्षा के नियमों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें दीक्षा की अवधि दो ...और पढ़ें

संत प्रेमानंद।

संत प्रेमानंद।

विपिन पाराशर, वृंदावन। श्रीराधानाम की महिमा का गुणगान व नामजप का संदेश देकर इंटरनेट मीडिया के जरिए देश दुनिया में लोगों का हृदय परिवर्तन करने वाले संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की आत्महत्या की घटना ने श्रीराधा केलिकुंज आश्रम में खलबली मचा दी है। आश्रम की चुप्पी ने बाहर अनुयायियों में भी संदेह उत्पन्न कर दिया है। अब आश्रम के नियमों भी लगातार बदलाव हो रहे हैं।

पहले अंतिम दीक्षा और शिष्यों की आश्रम में उपस्थिति पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगाई गई, फिर पहनावा बदला गया। अब संत प्रेमानंद की दीक्षा का इंतजार और बढ़ेगा। पहले दो वर्ष की साधना के बाद दीक्षा दी जाती थी, अब यह अवधि बढ़ाकर 12 वर्ष करने पर मथन किया जा रहा है। जल्द ही नियम में बदलाव होगा।

श्रीराधा केलिकुंज में संत प्रेमानंद से प्रभावित होकर पिछले पांच वर्षाें में हजारों शिष्यों ने दीक्षा ली है। इनमें अधिकतर शिष्य घर में ही रहकर साधना करते हैं और हजारों की संख्या में ऐसे साधक हैं जिन्होंने घर छोड़कर आश्रम की सेवाओं में जीवन गुजारने का संकल्प लिया है।

इन साधकों को दीक्षा लेने के लिए जो नियम हैं, उनके अनुसार राधावल्लभ संप्रदाय से जुड़ी पुस्तकें श्रीहित चौरासी, श्रीहित राधा सुधानिधि, श्रीहित सेवक वाणी, अष्टयाम सेवा पद्धति और नित्य रसोपासना का अध्ययन जरूरी है। लगभग दो वर्ष की अवधि तक इस उपासना में पास होने वाले साधक को ही दीक्षा देने के साथ आश्रम की सेवाओं में शामिल किया जाता है।

लेकिन, इसके लिए साधक के किसी स्वजन इसमें माता-पिता या जीवनसाथी की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है। लेकिन, जब साधक आश्रम की सेवाओं में जुड़ते हैं तो उन्हें विरक्त वेश रखना होता था और महिलाओं को सिर के बाल भी उतारने होते थे।

राधा केलिकुंज में साधकों के पहनावे के साथ अब दीक्षा में भी भारी परिवर्तन की योजना पर मंथन हो रहा है। संत प्रेमानंद के परिकर से जुड़े एक बड़े सााधक का कहना है कि अब दीक्षा के नियमों में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। खुद संत प्रेमानंद अब दीक्षा के लिए कड़े नियम बनाने के साथ आश्रम में ऐसे साधकों को चाहते हैं जो पूरी तरह हृदय में विरक्त भाव रखते हों।

इसके लिए उनकी उम्र भी तय की जाएगी और हृदय में विरक्त भाव उत्पन्न हुआ या नहीं ये जानने के लिए समय सीमा बढ़ाकर 12 वर्ष करने पर मंथन चल रहा है। आश्रम में साधना सेवा के लिए विरक्त वेश धारण करने की उम्र भी संभवत: 18 वर्ष कर दी जाएगी। जल्द ही आश्रम में बड़े बदलाव दिखाई देंगे।

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