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पुष्पक विमान में सवार होकर निकले ठाकुर गोदारंगमन्नार, वृंदावन की गलियों में स्वागत को उमड़ी भीड़

By Vipin Parashar Edited By: Prateek Gupta
Published: Tue, 17 Mar 2026 08:29 PM (IST)

वृंदावन के रंगजी मंदिर में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव का समापन भगवान रंगनाथ की पुष्पक विमान सवारी के साथ हुआ। देर ...और पढ़ें

वृंदावन में ठाकुर गोदारंगमन्नार के स्वागत में उमड़ी भीड़।

वृंदावन में ठाकुर गोदारंगमन्नार के स्वागत में उमड़ी भीड़।

HighLights

  1. रंगजी मंदिर में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव का समापन हुआ।

  2. वृंदावन की सड़कों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।

संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदावन। दक्षिण भारतीय परंपरा के रंगजी मंदिर में दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव का समापन सोमवार देर रात पुष्पक विमान में बैठ निकले भगवान रंगनाथ की सवारी के साथ हुआ।

रात करीब 10.30 बजे जैसे ही फूलों के विमान में बैठ ठाकुरजी की सवारी मंदिर के मुख्यद्वार पर पहुंची बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन व पूजन के लिए उमड़ पड़े। दिव्य और भव्य रंगोली सजाकर ठाकुरजी का स्वागत किया। साथ ही श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर भगवान रंगनाथ के जयकारे लगाए।

देर रात शुरू हुई भगवान की सवारी करीब साढ़े बारह बजे मंदिर लौटी। इस दौरान शहरभर के लोग सड़कों पर ठाकुरजी के स्वागत, दर्शन को उमड़ते रहे और भगवान रंगनाथ के जयकारे से शहर गूंजता रहा।

ठा. रंगजी मंदिर दिव्यदेश के ब्रह्मोत्सव के अंतिम दिन विभिन्न प्रकार के पुष्पो से सजे पुष्पक विमान में विराजमान ठा. गोदारंमन्नार के दर्शनों को भक्तों की भीड़ उमड़ी। ब्रह्मोत्सव के अंतिम दिन ठाकुरजी के स्वागत को मुख्य मार्ग पर भक्तों ने आकर्षक रंगोली सजाई गई।

रंगजी मंदिर दिव्यदेश के दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव में ठा. गोदारंगमन्नार प्रतिदिन स्वर्ण रजत निर्मित वाहनों में विराजित होकर भक्तों को दर्शन देने के लिए सुबह और शाम मंदिर से बाहर निकले थे।

अंतिम दिन सोमवार को ठाकुरजी श्वेत पोशाक और स्वर्ण-रजत, हीरे-जवाहरात के आभूषण धारण कर अपने पार्षदों संग पुष्पक विमान में विराजे और भक्तों को दर्शन देने निकले। सवारी गर्भगृह से बाहर आकर बारहद्वारी पर पहुंची तो कुंभ आरती उतारी गई। मंदिर परिसर से बाहर निकलते ही रंगनाथ भगवान के जयघोष गूंज उठे।

 

दिनभर बारह आराधन के कारण देर में निकलती है सवारी

मंदिर में ब्रह्मोत्सव के दौरान अनेक धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न होते हैं। रंगजी मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया ब्रह्मोत्सव के अंतिम दिन द्वादश आराधन होता है।

दिनभर में बारह बार ठाकुरजी की पूर्ण सेवा होती है, जो देर शाम करीब आठ बजे तक चलती है। इसके बाद ठाकुरजी को प्रसाद अर्पित किया जाता है और फिर विभिन्न पुष्पों से सुसज्जित विमान में बैठाकर ठाकुरजी की सवारी शुरू होती है।