मथुरा: बीते दिनों राधाकुंड और श्यामकुंड के पानी का उपचार हो चुका है। मगर, एक बार फिर इन दोनों उसी कवायद से जूझना पड़ेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक याचिका के जवाब में उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, डीएम और एमवीडीए की समिति गठित कर दो माह में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

एनजीटी सुशील राघव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें मथुरा के अरिता गांव में राधा और श्याम कुंड में सीवेज और घरेलू कचरे के निर्वहन को रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई थी। उचित सीवरेज प्रणाली के अभाव में संचित सीवेज और घरेलू कचरे को राधा कुंड में डाला जा रहा है। दलील में कहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के मुताबिक पानी पीने के लायक नहीं था और खाद्य विषाक्तता के बढ़ते मामलों का कारण दोनों कुंडों के दूषित पानी को माना जा सकता है। भरतपुर, एमएसजे सरकार के पीजी कॉलेज, जूलॉजी विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि कुंड के पानी में टर्बिडिटी, क्षारीयता, कठोरता, सल्फेट्स और क्लोराइड जैसे भौतिक रासायनिक पैरामीटर निर्धारित सीमा से काफी अधिक हैं।

इस पर एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक समिति का गठन किया। एसएन द्वारा पूर्व में किए गए सूक्ष्म जैविक परीक्षणों में दोनों कुंडों के जल में जीवाणु संक्रमण हैजा की उपस्थिति पाई गई थी।

पीठ ने कहा कि डायरिया की बीमारी के फैलने और उक्त परीक्षण के मामलों की बढ़ती संख्या दो कुंडों के पानी की गुणवत्ता के लिए बीमारियों के प्रकोप को जोड़ती है। नोडल एजेंसी समन्वय और अनुपालन के लिए यूपीपीसीबी होगी। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट सव‌र्ज्ञराम मिश्रा का कहना है कि ऐसे किसी आदेश की अभी उन्हें जानकारी नहीं है। एनजीटी ने गोवर्धन के कुंडों के संबंध में अलग से पहले ही आदेश दे रखा है। इस बारे में पहले से ही काम चल रहा है।

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Posted By: Jagran

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