गोवर्धन के मान मंदिर में वही घंटियां बजेंगी, वही कीर्तन होगा... बस रमेश बाबा नहीं होंगे
संत रमेश बाबा के ब्रह्मलीन होने के बाद भी बरसाना के मान मंदिर में सभी सेवा कार्य, जैसे आरती, संकीर्तन ...और पढ़ें

रमेश बाबा के देहावसान के बाद आश्रम पहुंचे मथुरा के डीएम और एसएसपी।
HighLights
मान मंदिर में आरती, संकीर्तन और गोसेवा पूर्ववत जारी।
संत रमेश बाबा की अनुपस्थिति हर कोने में महसूस हो रही है।
किशन चौहान, बरसाना। मान मंदिर में सब कुछ पहले जैसा है। मंदिर की घंटियां बज रही हैं, राधारानी के जयकारे गूंज रहे हैं, संकीर्तन चल रहा है और गोशाला में गोवंशी की सेवा भी जारी है। बदला है तो सिर्फ इतना कि इस पूरी व्यवस्था की धुरी रहे पद्मश्री संत रमेश बाबा जी महाराज अब दिखाई नहीं देंगे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद मान मंदिर में व्यवस्था चल रही है, मगर हर कोने में उनकी अनुपस्थिति का अहसास है।
संत रमेश बाबा ने मान मंदिर को साधना के साथ ब्रज सेवा का केंद्र बनाया। जीवनभर राधारानी की भक्ति, गोसेवा, पर्यावरण संरक्षण और ब्रज की धरोहरों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनके जाने से ब्रज ने केवल एक संत नहीं, बल्कि अपना सच्चा संरक्षक खो दिया है। बाबा ने सेवा की ऐसी मजबूत परंपरा खड़ी की कि उनके भौतिक रूप से न रहने पर भी व्यवस्था थमने वाली नहीं है।
आरती, संकीर्तन, गोसेवा, साधु सेवा और ब्रज संरक्षण के कार्य पूर्ववत चलते रहेंगे। सेवादारों और अनुयायियों के लिए अब बाबा की वाणी और उनके जीवन के संस्कार ही मार्गदर्शक हैं। ब्रज के जंगलों और पर्वतों को बचाने से लेकर बेसहारा गोवंशी की सेवा तक, बाबा ने अपनी साधना को समाज और प्रकृति की सेवा से जोड़ा। यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।
हर आंख नम, हर होठ चुप..
मान मंदिर के सेवादारों और भक्तों की आंखें नम हैं। उनके शब्दों में बाबा के जाने का दर्द साफ झलकता है। बाबा की देह भले ही पंचतत्व में विलीन हो गई, लेकिन उनका सेवा संकल्प मान मंदिर के कण-कण में जीवित है।
बरसाना की गलियों में ''राधे राधे'' की ध्वनि आज भी उसी तरह गूंज रही है, मगर अब इस ध्वनि के बीच बाबा की कमी हमेशा महसूस होगी। देर शाम आश्रम में मथुरा के डीएम सीपी सिंह और एसएसपी ने भी पहुंचकर शोक व्यक्त किया।
