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संत प्रेमानंद का गुरु पूर्णिमा पर संदेश, भगवान श्रीहरि से प्रेम करने वाले संतों का दर्शन ही दुर्लभ; नए ठिकाने पर कही नई बात

By Vipin Parashar Edited By: Prateek Gupta
Published: Sat, 25 Jul 2026 08:06 PM (IST)

संत प्रेमानंद ने गुरु पूर्णिमा पर वृंदावन में शिष्यों को संबोधित करते हुए मनुष्य जीवन की दुर्लभता और भगवान श्रीहरि ...और पढ़ें

गुरु पूर्णिमा अवसर पर अनुयायियों को संदेश देते संत प्रेमानंद।

गुरु पूर्णिमा अवसर पर अनुयायियों को संदेश देते संत प्रेमानंद।

HighLights

  1. मनुष्य जीवन दुर्लभ, क्षणभंगुर, संतों के दर्शन भी दुर्लभ।

  2. गुरु पूर्णिमा पर वृंदावन में हजारों शिष्यों का जमावड़ा।

संवाद सहयोगी, वृंदावन। संत प्रेमानंद ने कहा वृंदावन की पावन भूमि यमुनाजी के पावन पट पर बैठे हैं, आप वृंदावन का लाभ लेने आए हैं, तो आनंद लीजिए। कहा मनुष्य का जीवन शास्त्रों में दुर्लभ कहा गया है। मनुष्य देह बड़ा दुर्लभ है, पर ये क्षण भंगुर है, किसी समय भी मर सकते हो, कोई भी घटना, कोई भी व्यक्ति निमित्त बन सकता है और आपका शरीर नष्ट हो सकता है।

इस दुर्लभ देह की दुर्लभता है कि हम भगवान श्रीहरि के प्रेम करने वाले प्रेमी संतों का दर्शन दुर्लभ है। यमुना पार जहांगीरपुर स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शनिवार को दीक्षित शिष्यों को संबोधित करते हुए संत प्रेमानंद ने कहा जिनकी संतों पर भगवत बुद्धि है, उनको लाभ मिलेगा कि उनका जन्म मरण मिट जाएगा, मोक्ष हो जाएगा और जिनकी साधारण श्रद्धा है उनके पाप नष्ट हो जाएंगे।

भगवान श्रीहरि के प्रेमीजनों का दर्शन मिलना, उनके प्रवचनों का लाभ मिलना ही मनुष्य जन्म की दुर्लभता को सार्थक करने का रास्ता है। गोकर्णजी का वर्णन करते हुए संत प्रेमानंद ने कहा सदैव धर्म का भजन करना चाहिए। भजन का मतलब होता है सेवन, मतलब धर्म का धारण करना चाहिए। हमारा शास्त्र कहता है हमें मनुष्य का जन्म लेकर धर्म पर चलना चाहिए

जिसे शास्त्र और संत पालन करने को कहते हैं, वह धर्म है और शास्त्र और संत जिस काम को न करने की कहते हैं न करो, उसे अधर्म कहते हैं। इसलिए हमें निरंतर धर्म से रहना चाहिए। हमें पारिवारिक धर्म भी जिम्मेदारी से निभाना चाहिए। लेकिन, केवल इससे भगवतप्राप्ति नहीं होती, इस धर्म का फल ही भागवतधर्म को प्राप्त करना है। हमें लोक धर्मों का त्याग करके भागवत धर्म का पालन करना चाहिए।

तीन राज्यों से आए शिष्य

यमुना विहार आश्रम में शनिवार को पंजाब, मध्यप्रदेश, झारखंड के हजारों दीक्षित शिष्य संत प्रेमानंद के दर्शन व पूजन करने को पहुंचे थे। उधर, श्रीराधा केलिकुंज में भी मनाए जा रहे गुरू पूर्णिमा महोत्सव में सुबह से ही देशभर के भक्तों ने संत प्रेमानंद के पादुका पूजन कर अपने गुरू के प्रति आस्था समर्पित की

श्रीराधा केलिकुंज पर भी भक्तों की भारी भीड़ पादुका पूजन के लिए पहुंच रही है। रविवार को यमुना विहार कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद के दर्शन व पूजन को राजस्थान, हिमाचल, असोम, महाराष्ट्र, तेलंगाना के दीक्षित शिष्य पहुंचेंगे।