विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

संत प्रेमानंद के दर्शन की जागी फिर आस, श्रीराधा केलिकुंज के बाहर जुटने लगे लोग

By Vipin Parashar Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 09 Oct 2026 06:41 PM (GMT+05:30)

संत प्रेमानंद के शिष्य की आत्महत्या के बाद लंबे समय से श्रीराधा केलिकुंज आश्रम नहीं आने के बावजूद, उनके अचानक ...और पढ़ें

लंबे समय बाद गुरुवार सुबह अचानक संत प्रेमानंद श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे थे।

लंबे समय बाद गुरुवार सुबह अचानक संत प्रेमानंद श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे थे।

संवाद सहयोगी, वृंदावन। संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की आत्महत्या के बाद इंटरनेट मीडिया पर भले ही तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हों, लेकिन गुरु के प्रति अनुयायियों की आस्था अब भी कायम है। संत की एक झलक पाने के लिए भक्तों में ऐसी व्याकुलता है कि उनके वृंदावन आने की सूचना मिलते ही दूसरे शहरों से भी श्रद्धालु श्रीराधा केलिकुंज आश्रम पहुंचने लगे हैं।

गुरुवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे संत प्रेमानंद के अचानक आश्रम पहुंचने की खबर फैलते ही कुछ ही देर में सैकड़ों अनुयायी दर्शन की आस में जुट गए। शुक्रवार सुबह भी आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। हालांकि, शुक्रवार को संत प्रेमानंद आश्रम नहीं पहुंचे।

संत प्रेमानंद ने 18 मई से अपनी रात्रिकालीन पदयात्रा और एकांतिक दर्शन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए थे। इसके बाद वह बेलवन में यमुना किनारे स्थित अपने नए आश्रम यमुना विहार कुंज में रहने लगे। वह महीने में एक-दो बार श्रीराधा केलिकुंज आते हैं। 25 सितंबर को उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी ने आश्रम के पास गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी। तब से संत नहीं आए।

गुरुवार को संत श्रीराधा केलिकुंज आश्रम कुछ देर के लिए आए तो शुक्रवार को अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक श्रद्धालु दर्शन की उम्मीद में पहुंचे। दिल्ली से आए ईशान चौधरी ने बताया कि वह पहले सप्ताह में एक दिन संत की पदयात्रा में दर्शन करने आते थे।

गुरुवार को संत के आश्रम आने की जानकारी मिली तो वह तुरंत पहुंच गए। एक-दो दिन दर्शन की उम्मीद में यहीं रुकेंगे। कानपुर निवासी अजित कुमार त्रिवेदी ने बताया कि जन्माष्टमी से पहले और उसके अगले दिन उन्हें गुरुदेव के दर्शन हुए थे।