संवादसूत्र, सौंख (मथुरा): जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर के टंगडार इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए पुष्पेंद्र ¨सह को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। चाचा बनवारी की गोद में आठ माह के सिद्धार्थ ने अपने बहादुर पिता को मुखाग्नि दी। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने शहीद के परिजनों को बीस लाख और पांच लाख रुपये के दो चेक दिए और वीरनारी को एक माह के अंदर राज्य सरकार में नौकरी दिए जाने की घोषणा की।

तहसील गोवर्धन के गांव खुटिया की गलियों में सुबह से ही गांव के वीर सपूत के अंतिम दर्शन करने के लिए रिश्तेदार और आसपास के ग्रामीणों की आवाजाही बनी हुई थी। शहीद के घर के पास हजारों लोग मौजूद थे। पत्नी सुधा ¨सह बेसुध थीं। मां महावीरी देवी और पिता तेज सिहं के आंसू थम नहीं रहे थे। करीब तीस घंटे बाद सेना की टुकड़ी शहीद के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेट कर पैतृक गांव पहुंची तो शहीद को अंतिम सलामी देने के लिए जन समुद्र उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी और जुबां पर पुष्पेंद्र ¨सह की कुर्बानी के किस्से थे। गांव की गलियों में बीते उसके बचपन की यादें हर ग्रामीण को रुला रही थीं। रह-रह कर उठ रहे अमर रहो के नारों में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश साफ सुनाई दे रहा था। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मुख्यमंत्री योगी के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी और डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने शहीद की पत्नी को बीस लाख रुपये का चेक दिया, जबकि पांच लाख रुपये का चेक माता-पिता को दिया। एसएसपी बबलू कुमार भी शहीद को अंतिम सलामी देने को गांव पहुंचे। शव यात्रा में करीब तीन हजार लोग शामिल हुए। गांव के बाहर सौंख-गोवर्धन मार्ग के किनारे शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। विधायक का¨रदा ¨सह, चेयरमैन सौंख भरत ¨सह कुंतल, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सुरेश ¨सह, प्रह्लाद ¨सह, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि बाबू लाल, प्रीतम ¨सह, बृजवासी शर्मा, नरदेव ¨सह, हेमराज ¨सह, राजकुमार चौधरी, राजवीर ¨सह, वीरपाल ¨सह, बलजीत ¨सह, सत्य प्रकाश ¨सह ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। गर्व से बोली सुधा, शहीद की पत्नी हूं : कैबिनेट मंत्री प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ जब शहीद की पत्नी सुधा ¨सह को चेक दे रहे थे, जब सुधा ने दहाड़ते हुए कहा कि वह अब शहीद की पत्नी कहलाएगी। उसने कहा कि उसके पति बहादुर थे। अकेले ही सौ-सौ दुश्मनों से मुकाबला करने की हौसला रखते थे। आज वह हमसे दूर चले गए, लेकिन मैं अपने पति की बहादुरी की याद के साथ जीऊंगी और अपने बेटे को भी उसके पिता की तरह बहादुर बनाऊंगी। उसने कहा कि उसके पति को दुश्मनों से धोखे से मारा होगा। गांव का लाड़ला था पुष्पेंद्र:

शहीद पुष्पेन्द्र ¨सह के बडे़ भाई बनवारी ने बताया कि पुष्पेन्द्र 2011 में जाट रेजीमेंट मथुरा में भर्ती हुआ था। वह पहले ही साहसी था। वर्ष 2017 में उसकी शादी जौनाई आगरा निवासी सुधा ¨सह के साथ हुई थी। पुष्पेन्द्र के एक बेटा सिद्धार्थ है। पुष्पेन्द्र को माह दिसम्बर में अपने बेटे के जन्मदिन पर लौट कर आना था। जो अब कभी नहीं आएगा। --भड़का आक्रोश:

तीस घंटे से अपने बहादुर साथी के अंतिम दर्शन के लिए इंतजार कर रहे युवाओं का आक्रोश फूट पड़ा। वह इस बात को लेकर भी आक्रोशित थे कि कोई भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शहीद के परिवार को सांत्वना देने के लिए नहीं आया। इसी बात को लेकर ग्रामीणों ने सौंख-गोवर्धन मार्ग पर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा। मंत्री, डीएम और एसएसपी के काफिले के पहुंचने के बाद जाम खोला गया।

Posted By: Jagran

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