श्रद्धालु अपनी रक्षा खुद करें! वर्ष 1998 में सुरक्षा के लिए तैनात की थी रिवर पुलिस, मथुरा में भक्त बढ़े पर सुविधाएं नहीं
मथुरा में 1998 में हाईकोर्ट के आदेश पर यमुना की स्वच्छता, अतिक्रमण रोकने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए रिवर ...और पढ़ें

वृंदावन के केशीघाट पर मोटरबोट से यमुना में डूबे लोगों की खोज करता बचाव दल।फोटो जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मथुरा। वर्ष 1998 में हाई कोर्ट के आदेश पर यमुना को स्वच्छ रखने, अतिक्रमण न होने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जिले में रिवर पुलिस की टीम बनाई गई थी। ये टीम मथुरा से वृंदावन तक यमुना किनारे पेट्रोलिंग करती थी, साथ ही अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को देती थी।
समय के साथ टीम में शामिल पुलिसकर्मी रिटायर हो गए या तबादले पर चले गए। लेकिन, इस ओर किसी की तैनाती नहीं की गई। नतीजा यह कि यमुना किनारे अतिक्रमण की भरमार है तो श्रद्धालुओं की जान भी खतरे में पड़ रही है। वहीं यमुना नदी में गंदगी भी बढ़ती जा रही है।
आठ में से कुछ के तबादले तो कुछ हो गए रिटायर, कई वर्ष से कोई तैनाती नहीं
समाजसेवी गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया, पहले श्रद्धालुओं की संख्या सीमित थी। यमुना को स्वच्छ रखने, अतिक्रमण न होने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वर्ष 1998 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर हाई कोर्ट ने जिले की पुलिस को आठ सदस्यीय रिवर पुलिस टीम गठित करने के आदेश दिए थे। इस पर एक उपनिरीक्षक, एक मुख्य आरक्षी और छह आरक्षियों की एक रिवर पुलिस टीम बनाई गई थी। स्वामी घाट पर अस्थाई पुलिस चौकी बनाई गई।
यमुना नदी स्वच्छ रखने के साथ अतिक्रमण पर नजर रखती थी रिवर पुलिस
पुलिसकर्मियों के रहने के लिए एक कक्ष भी निर्धारित किया गया। रिवर पुलिस का बोर्ड लगाया गया। ये टीम सीओ की निगरानी में काम को अंजाम देती थी। टीम का मुख्य काम यमुना में पशुओं व मानव के शव बहाने, गंदगी डालने, मछलियों का शिकार करने, कपड़े धोने से लोगों को रोकने के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा करना था। रिवर टीम मथुरा से वृंदावन तक नाव के जरिए पेट्रोलिंग कर अपना काम करती थी।
समय गुजरने के साथ टीम में शामिल पुलिसकर्मियाें के तबादले हो गए
कुछ वर्ष तो सब कुछ ठीक रहा, लेकिन समय गुजरने के साथ टीम में शामिल पुलिसकर्मियाें के तबादले हो गए या फिर सेवानिवृत्त हो गए। लेकिन, पुलिस अधिकारियों ने इनके स्थानों पर दूसरों की तैनाती नहीं की। समाजसेवी गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया, आज श्रद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। कई बार उन्होंने बैठकों में यह मामला उठाया है, मगर नतीजा सिफर रहा है।
बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या, नहीं की तैनाती
करीब एक दशक से यमुना मैया के दर्शन व पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुणा वृद्धि हो गई। लेकिन, जिले के पुलिस अधिकारियों ने रिवर पुलिस की ओर ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप यमुना किनारे अतिक्रमण हो गए, गंदगी की भी भरमार हो गई और श्रद्धालु भी खतरे में पड़ गए। पुलिस अब भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। मौजूदा समय रिवर पुलिस टीम की जरूरत महसूस की जा रही है।
