Radha Ashtami: ब्रह्मांचल पर्वत पर बना 500 साल पुराना मंदिर, बरसाना के राधा रानी Temple की है विशेष मान्यता
Radha Ashtami 2026: राधा रानी का जन्मोत्सव भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को बरसाना के लाडली जी मंदिर में धूमधाम से मनाया ...और पढ़ें

Radha Ashtami 2026: बरसाना में राधा रानी का जन्मोत्सव
HighLights
राधा रानी का जन्मोत्सव भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मनाया जाएगा।
बरसाना का 500 साल पुराना राधा रानी मंदिर ब्रह्मांचल पहाड़ी पर।
भक्तों के लिए विशेष महत्व, 19 सितंबर को जन्मोत्सव।
डिजिटल डेस्क, मथुरा। Radha Ashtami 2026: कीरतसुता के जन्मोत्सव को लेकर उनके गांव बरसाना में उत्साह देखने को मिलता है। बरसाना का राधा रानी मंदिर,जिसे प्रेम से लाडली जी का मंदिर भी कहा जाता है। यहां हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन राधा अष्टमी का दिन त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
राधा रानी मंदिर उत्तर प्रदेश के बरसाना में स्थित है और पूर्ण रूप से श्री राधा रानी को समर्पित है। यहां के लोगों की मान्यता है कि जिसने बरसाना की रानी लाड़ली जी के दर्शन कर लिए, उसके जीवन में प्रेम और भक्ति का रस कभी कम नहीं होता। 19 सितंबर की सुबह चार बजे उनके निज महल में जन्मोत्सव मनेगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद आता है राधा का जन्मोत्सव
राधा का जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लगभग 15 दिन बाद आता है। राधा जी के पिता का नाम वृषभानु जी और माता का नाम कीर्ति जी था। उनका जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को हुआ था। इस दिन बरसाना में भव्य उत्सव होता है। मंदिर को फूलों से सजाया जाता है, विशेष श्रृंगार किया जाता है और राधा जी को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है। अगर आप इस शुभ असवर पर राधाजी के मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप राधा रानी के मंदिर (Shri Radha Rani Temple) जरूर जाएं। आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में।

राधा रानी मंदिर का निर्माण
राधा रानी मंदिर का निर्माण लगभग 500 वर्ष पहले ओरछा नरेश ने कराया था। बरसाना का राधा रानी मंदिर एक ऊंची ब्रह्मांचल पहाड़ी पर स्थित है, जिसे बरसाने का माथा कहा जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 250 मीटर है। भक्तजन जब सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हैं, तो हर कदम पर भक्ति और उत्साह की अनुभूति होती है। राधा रानी मंदिर लाल बलुआ पत्थर से बना है और मंदिर में स्तंभ हैं। इसमें मुगल काल की संरचना देखने को मिलती है।
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा रानी का अवतरण हुआ था
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद 15 दिन बाद भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा रानी का अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इसी वजह से राधा रानी के भक्तों के लिए यह मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण है।

ये है मंदिर की टाइमिंग
बरसाना का प्राचीन राधा रानी मंदिर सुबह 05 बजे खुलता है और दोपहर में 02 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। वहीं, संध्याकाल में 05 बजे मंदिर के कपाट दर्शनों के लिए खोल दिए जाते हैं और 09 बजे मंदिर बंद होता है।
इस तरह पहुंचे राधा रानी मंदिर
अगर आप राधा रानी के मंदिर जाना जाते हैं, तो यह मंदिर दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर स्थित कोसीकलां से सात किमी की दूरी पर है। मथुरा से इस मंदिर की दूरी करीब 55 किमी की है। मंदिर तक बस, कार या टैक्सी की मदद से आसानी से पहुंच सकते हैं।
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ब्रज के प्रमुख उत्सव
राधाष्टमी
यह राधा जी का जन्मदिन है। इस दिन मंदिर में राधा रानी का विशेष श्रृंगार होता है। भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है, भजन-कीर्तन गूंजते हैं और मंदिर परिसर फूलों की वर्षा से महक उठता है।
कृष्ण जन्माष्टमी
श्रीकृष्ण के जन्मदिवस पर यहां अद्भुत सजावट होती है। राधा-कृष्ण के झूले सजाए जाते हैं और भक्त पूरी रात भक्ति-रस में डूबे रहते हैं।
लट्ठमार होली
बरसाना की सबसे प्रसिद्ध परंपरा। इस दिन महिलाएं खेल-खेल में पुरुषों को लट्ठ से मारती हैं और पुरुष ढाल लेकर रक्षा करते हैं। यह दृश्य देखने के लिए देश-विदेश से हजारों लोग यहां आते हैं। बरसाना की होली रंगों और प्रेम की होली होती है।
