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BVSc डिग्री से बनें पशु चिकित्सा अधिकारी या सेना में कैप्टन: जानें करियर विकल्प

By Viveka Nand Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 15 Oct 2026 11:58 PM (IST)

पशु चिकित्सा में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए बीवीएससी (BVSc) डिग्री एक बेहतरीन विकल्प है। मथुरा के पंडित ...और पढ़ें

पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय।

जागरण संवाददाता, मथुरा। अगर आपको पशु चिकित्सा में अधिकारी एवं सेना में कैप्टन बनना है तो परेशान न हों। आप पांच वर्षीय बीवीएससी (बेचलर आफ वेटेरिनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री) की पढ़ाई कर डिग्री हासिल कर सकते हैं। ये बड़े काम की डिग्री है। इसके जरिए आप सरकारी विभागों में पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुधन अधिकारी एवं सेना में भी कैप्टन बन सकते हैं।

जिले के युवाओं को इसके लिए बाहर भी नहीं जाना होगा। क्योंकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान परिषद में ही महाविद्यालय है। अब तक यहां से एक हजार से अधिक युवा ये डिग्री कर सरकारी विभागों एवं निजी क्षेत्र में नौकरी कर अपना भविष्य बना चुके हैं।

वेटेरिनरी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. देशदीपक सिंह ने बताया, ये पांच वर्षीय डिग्री है। इसके जरिए सरकारी विभाग के अलावा सेना एवं अन्य क्षेत्र में भी नौकरी की संभावनाएं रहती हैं। शासन द्वारा मथुरा में वर्ष 1947 में पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय की स्थापना की थी। शुरुआती दौर में यहां 50 सीटें थीं। लेकिन, वर्ष 2001 में विश्वविद्यालय बनने के बाद 100 सीटें हैं।

इनमें से 85 प्रतिशत सीटें प्रवेश प्रक्रिया के जरिए तथा शेष 15 प्रतिशत भारतीय पशु चिकित्सा परिषद नई दिल्ली द्वारा भरी जाती हैं। प्रवेश नीट के माध्यम से होता है। ये पशुओं के डाक्टर बनने के लिए एक प्रमुख पेशेवर स्नातक डिग्री है।

यह है प्रवेश का समय

फरवरी में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होती है। आवेदन आनलाइन लिए जाते हैं। करीब दो माह आवेदन का समय होता है। मई में प्रवेश परीक्षा होती है।

यहां हैं नौकरी की संभावनाएं

राज्य पशु चिकित्साधिकारी, पशुधन विकास अधिकारी, आर्मी में आरवीसी कैप्टन, बीएसएफ, आइटीबीपी व एसएसबी में पशु चिकित्सा अधिकारी बन सकते हैं। इस डिग्री के बाद एमवीएससी, एमडी या पीएचडी करने के बाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में वैज्ञानिक, सहायक प्रोफेसर एवं शिक्षक भी बन सकते हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण में फूड सेफ्टी आफिसर, एयरपोर्ट व बंदरगाह विभाग में क्वारंटाइन अधिकारी, डेरी विकास बोर्ड में नौकरी की संभावना रहती है।

निजी व कारपोरेट क्षेत्र में कंपनियों में टेक्निकल सर्विसेज मैनेजर, प्रोडक्ट मैनेजर या रिसर्च एंड डवलपमेंट अधिकारी, पोल्ट्री व डेरी फार्म में मुख्य पशु चिकित्सक भी बन सकते हैं। इसी तरह प्राइवेट पेट क्लीनिक व हास्पिटल खोल सकते हैं या नौकरी कर सकते हैं। इस डिग्री करने के बाद सिविल सेवा में वेटेरिनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंडरी को विकल्प विषय के रूप में चुनकर आइएएस या आइएफएस की तैयारी कर सकते हैं।

जरूरी बातें 

  • 1947 से मथुरा में चल रहा सरकारी पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय।
  • 05 वर्षीय डिग्री, हर वर्ष 100 सीटों पर नीट के माध्यम से होता प्रवेश।
  • 85 प्रतिशत सीट प्रवेश प्रक्रिया से, 15 प्रतिशत भारतीय पशु चिकित्सा परिषद से भरी जातीं।