जागरण संवाददाता, मथुरा : गर्मियां आते ही पोशाकों का बाजार भी ठाकुर जी के अनुरूप ही सजने लग गया है। छत्ता बाजार व राजाधिराज बाजार में गर्मी से राहत देने के लिए लड्डू गोपाल की पोशाकें आ गई हैं। ये 50 से लेकर तीन सौ रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं। इनको बनाने में कुछ इस तरह का कपड़ा प्रयोग किया गया है, ताकि कान्हा को शीतलता मिल सके। अभी दुकानदारों पर विभिन्न वैरायटियों की कुछ और पोशाकों का स्टॉक आना भी बाकी है।

तापमान में हर रोज हो रही वृद्धि का असर अब ठाकुर सेवा पर भी दिखने लगा है। कामदा एकादशी से मंदिरों में फूल बंगला बनने प्रारम्भ हो गए हैं, वहीं ठाकुरजी को शीतलता देने के लिए बाजार में विभिन्न वैरायटियों की पोशाकें भी आ गई हैं। इनमें आर्कंडी, नेट, वाइल, सूती आदि किस्म की पोशाकें शामिल हैं। आकार के आधार पर इनका बिक्री मूल्य रखा गया है। शुरूआती कीमत 50 से लेकर तीन सौ रुपये तक निर्धारित की गई है। दुकानदारों ने विगत वर्ष की मांग के अनुरूप दुकानों में माल का स्टाक किया है। उन्हें उम्मीद है कि अप्रैल के शुरूआत से ही इन पोशाकों की डिमांड में वृद्धि होगी। सर्वविदित है कि मथुरा में कान्हा का जन्म होने के कारण यहां ठाकुरजी की सेवा बाल स्वरूप में ही की जाती है। यही कारण है कि प्रत्येक मौसम में अराध्य का उसी प्रकार ध्यान रखा जाता है। वर्जन--

50 से लेकर तीन सौ रूपए तक की रेंज में ठाकुरजी की पोशाकें मौजूद हैं। अप्रैल के प्रारम्भ में बिक्री की अधिक संभावना है। इस बार अधिक मास पड़ने के कारण भी बिक्री का ग्राफ विगत वर्ष की अपेक्षा अधिक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजकुमार अग्रवाल, पोशाक व्यवसाई

अभी कुछ ही मांग शुरू हुई है। आर्कंडी, नेट, वाइल, सूती आदि किस्में शीतलता प्रदान करने वाली है। गर्मी के दिनों में इन्हीं की ज्यादा मांग रहती है। इन्हीं को आधार बनाकर माल का ऑर्डर मंगाया है। ठंडक प्रदान करने के लिए विभिन्न तरह के चंदन भी उपलब्ध है।

कुलदीप दुबे, पोशाक व्यवसाई।

Posted By: Jagran

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