'नीले ड्रम' वाली मुस्कान को सजा-ए-मौत, मथुरा जेल का फांसीघर आया फिर चर्चा में
मेरठ की मुस्कान रस्तोगी को 'नीले ड्रम' हत्याकांड में मौत की सज़ा सुनाई गई है, जिससे मथुरा जेल का महिला ...और पढ़ें

मेरठ की मुस्कान रस्तोगी।
जागरण संवाददाता, मथुरा। नीले ड्रम में पति की हत्या कर लाश ठिकाने वाली मेरठ की मुस्कान देशभर में चर्चाओं में रही। अब वह एक बार फिर सुर्खियों में है। अदालत ने उसे सजा-ए-मौत सुनाई है। मथुरा जिला कारागार में महिलाओं का फांसी घर है। हालांकि आजादी के बाद से अब तक मथुरा जिला कारागार के महिला फांसीघर में किसी भी कैदी को फांसी नहीं दी गई है।(
देश में महिला मृत्युदंड के चर्चित मामलों के बीच यह फांसीघर बार-बार सुर्खियों में आता रहा है। प्रदेश में मथुरा जिला कारागार में ही महिलाओं के लिए फांसी घर बना है। अमरोहा हत्याकांड की दोषी शबनम अली से लेकर मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में सजा पाने वाली मुस्कान रस्तोगी तक के मामलों ने महिला फांसीघर को लेकर चर्चाएं तेज की हैं।
हालांकि, मथुरा में आजादी के बाद से किसी महिला को फांसी दिए जाने का इतिहास नहीं है। देश में महिला बंदियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के मामलों के बावजूद यहां आजादी के बाद से किसी महिला को फांसी नहीं दी गई। जब भी किसी चर्चित महिला कैदी की फांसी का मामला सामने आता है, मथुरा के जिला कारागार का फांसीघर चर्चाओं में आने लगता है।
अमरोहा के चर्चित हत्याकांड में शबनम अली को अपने परिवार के सात सदस्यों की हत्या का दोषी ठहराया गया था। वर्ष 2008 में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। शबनम को मृत्युदंड सुनाया गया और उसकी दया याचिका खारिज होने की खबरों के बाद मथुरा के महिला फांसीघर को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई थीं। हालांकि, उसे अब तक फांसी नहीं दी गई है।
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी को अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने की खबर ने महिला मृत्युदंड के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। आंकड़ों के अनुसार, मुस्कान को शामिल करने के बाद उत्तर प्रदेश में मृत्युदंड पाने वाली महिलाओं की संख्या 10 बताई जा रही है। वहीं, देशभर में ऐसी महिलाओं की संख्या 21 होने का दावा किया गया है।
हालांकि, मृत्युदंड सुनाया जाना और वास्तव में फांसी दिया जाना दो अलग-अलग स्थितियां हैं। अदालत के फैसले के बाद भी कानूनी अपील, दया याचिका और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए किसी महिला को फांसी दिए जाने की चर्चा को वास्तविक क्रियान्वयन नहीं माना जा सकता। मथुरा का महिला फांसीघर इसी अंतर की गवाही देता है।
महिला मृत्युदंड के चर्चित मामले सामने आते रहे, लेकिन आजादी के बाद से यहां किसी महिला को फांसी नहीं दी गई। यही वजह है कि देश में महिला मृत्युदंड से जुड़ा कोई भी बड़ा मामला सामने आने पर मथुरा जेल का नाम फिर सुर्खियों में आ जाता है। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि आजादी के पहले का कोई रिकार्ड नहीं है। आजादी के बाद से किसी महिला कैदी को फांसी नहीं दी गई है
