कान्हा की नगरी पहुंचे मोरारी बापू, बोले- कलियुग में बंदी बने बैठे हैं कृष्ण, अब मुक्त हो जन्मभूमि
मोरारी बापू की भारत स्वास्तिक यात्रा मथुरा पहुंची, जहां उन्होंने रामकथा का शुभारंभ किया। इस दौरान बापू ने कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और यमुना की स्वच्छता की कामना की।

मानस वक्ता मोरारी बापू।
HighLights
मोरारी बापू की भारत स्वास्तिक यात्रा मथुरा पहुंची।
उन्होंने कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति की कामना की।
यमुना नदी की स्वच्छता पर भी जोर दिया।
जागरण संवाददाता, मथुरा। यमुना की लहरों का कलकल नाद, कान्हा की नगरी का आध्यात्मिक वैभव और वातावरण में घुलता राम नाम का रस। मानस वक्ता मोरारी बापू की भारत स्वास्तिक यात्रा करीब ढाई हजार किमी की दूरी तय कर शनिवार को कृष्ण के आंगन में पहुंची।
कान्हा की पटरानी कालिंदी के किनारे रामकथा शुरू हुई। बापू के मुख से पहली जो प्रार्थना थी, वह करोड़ों दिल से निकलने वाली भावना थी। वह बोले- भगवान करे, कृष्ण जन्मभूमि अब मुक्त हो जाए। यमुना मैया भी स्वच्छ हों। बापू की यात्रा कन्याकुमारी से 12 अक्टूबर को दो विशेष ट्रेन से केदारनाथ तक के लिए आगे बढ़ी। आठवें पड़ाव पर यात्रा ब्रज पहुंची।
'कलियुग में कृष्ण बंदी बने बैठे'
यहां गोपाल आश्रम में शनिवार को एक दिवसीय रामकथा थी। यहां मोरारी बापू पूरी तरह ब्रज के रंग में थे। बोले, यह रूप की भूमि है। शब्द, स्पर्श और रस की भूमि है। कलियुग में कृष्ण यहां बंदी बने बैठे हैं। भगवान करे, श्रीकृष्ण जन्मभूमि अब मुक्त हो जाए। यमुना पवित्र तो हैं हीं, लेकिन यह स्वच्छ रहें, इसकी जिम्मेदारी हम सबकी है।
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आजकल के वातावरण में भी यह काम नहीं होगा तो फिर कब होगा? यात्रा संयोजक मदन पालीवाल और रूपेश व्यास ने बताया कि यात्रा यहां से कुरुक्षेत्र और 23 अक्टूबर को अंतिम पड़ाव केदारनाथ पहुंचेगी। दूसरे चरण की यात्रा 14 नवंबर को द्वारका से जगन्नाथपुरी को रवाना होगी।
