मथुरा में करवा चौथ पर रिश्तों में मिठास घोल रहे खांड के करवे, पीढ़ियों पुरानी परंपरा आज भी है बरकरार
करवा चौथ पर मथुरा में खांड के करवों की परंपरा आज भी जीवित है, जो रिश्तों में मिठास घोलती है। ...और पढ़ें
-1792932188390_m.webp)
यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
खांड के करवों से रिश्तों में मिठास घोलने की परंपरा।
सास और जेठानियों को करवे दान करने का महत्व।
करवा चौथ पर मथुरा में खांड के करवों की बंपर मांग।
संवाद सूत्र, सुरीर। प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास के महापर्व करवा चौथ की आहट से ही बाजारों में रौनक और घरों में उत्साह का माहौल छा गया है। सुहाग के इस पावन पर्व पर जहां एक ओर सुहागिनें मिट्टी के करवे से चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं आज भी खांड (चीनी) के करवों के दान की परंपरा पूरी शिद्दत के साथ निभाई जा रही है।
हलवाइयों की दुकानों पर इन दिनों खांड चीनी की चाशनी से कलात्मक करवे तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। मान्यता है कि खांड (चीनी) से बने इन करवों में बादाम, काजू, किशमिश और मखाने जैसी मेवे भरकर सास, जेठानी और अपनी मान्यों को दान करने से रिश्तों में आजीवन मिठास बनी रहती है और घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
नवविवाहिताओं के लिए उनके जीवन के पहले करवा चौथ को और भी खास बनाने के लिए मायके से खास सौगात भेजी जाती है। परंपरा को निभाते हुए लोग अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार 21, 51 और 101 चीनी के करवे अपनी बहन-बेटियों की ससुराल भेज रहे हैं। मिठाई विक्रेता कृष्ण कुमार वार्ष्णेय बताते हैं कि इन दिनों खांड चीनी के करवों की बंपर डिमांड है, जिसे पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
महिला पूनम का कहना है कि वह हर वर्ष करवा चौथ पर खांड चीनी से बने करवे मनसती हैं, क्योंकि इनका दान करना परिवार के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पं. भूपेंद्र शास्त्री का कहना है कि करवा चौथ केवल व्रत का नाम नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का पर्व है, जिसमें मिठास बांटने की यह संस्कृति पीढ़ियों से हमारी परंपरा का अटूट हिस्सा बनी हुई है।
