मथुरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर 70 लाख बकाया, गंगाजल आपूर्ति पर गहराया संकट
मथुरा में जल निगम नगरीय वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन और मरम्मत के लिए नगर निगम पर 70 लाख रुपये बकाया होने के कारण संकट में है।

मथुरा: गोकुल बैराज स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट। फोटो जागरण आर्काइव
जागरण संवाददाता, मथुरा। अमृत योजना के तहत 22 वर्ष पूर्व तैयार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन एवं मरम्मत आदि कार्य के लिए धनराशि न मिलने पर जल निगम नगरीय ने इसके संचालन से हाथ खड़े करने का मन बनाया है। प्लांट संचालन का नगर निगम पर 70 लाख रुपये बकाया चल रहा है।
वहीं, मरम्मत एवं नई मोटर खरीदने के लिए भी एस्टीमेट भेजे हैं, मगर इस ओर नगर निगम ध्यान नहीं दे रहा। इसके कारण प्लांट संचालन पर संकट खड़ा हो गया है। अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो शहर में गंगाजल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
वर्ष 2004 में गोकुल बैराज पर करीब 100 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जल निगम नगरीय द्वारा बनवाया गया। यहां से 25 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति नगर निगम के 70 में से 21 वार्ड में होती है। इस प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी जल निगम नगरीय द्वारा की जा रही है। पहले इसके संचालन के लिए छह लाख रुपये प्रतिमाह मिलते थे।
जल निगम नगरीय के सहायक अभियंता नसीम अहमद ने बताया, प्लांट में लगी मशीनें व मोटरें 22 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं। मोटरें आए दिन खराब हो रही हैं। नगर निगम पर प्लांट संचालन का 70 लाख रुपये बकाया है।
वहीं, तीनों नई मोटरों की खरीद के लिए 32 लाख रुपये, प्लांट की चहारदीवारी, कैंपस की मरम्मत के लिए 13 लाख रुपये, फिल्टर हाउस एवं क्लेरिफ्लोक्यूलेटर मशीन की मरम्मत के लिए मांगे हैं। लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मोटरें पुरानी होने के कारण आएदिन खराब होने एवं अन्य कार्य न होने के कारण आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, भुगतान न होने के कारण इसके संचालन में मुश्किल हो रही है। ऐसे हालात में प्लांट का संचालन होना संभव नहीं है। उन्होंने बताया, कई बार इस संबंध में नगर आयुक्त को पत्र भेजा गया, मगर अब तक भुगतान नहीं किया गया है।
बीते दिनों खराब हो गई थी पंप
बीते दिनों प्लांट पर लगी दो पंप खराब हो गईं थी। इसके कारण आठ दिन गंगाजल की आपूर्ति प्रभावित रही थी। इनकी मरम्मत पर भी नगर निगम का काफी पैसा खर्च हो रहा है।
