धर्म की नगरी में फेरे लेने की चाहत, मथुरा-वृंदावन में डेस्टिनेशन वेडिंग को बुकिंग; आश्रमों में भी इंतजाम
मथुरा-वृंदावन डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए पसंदीदा जगह बन रहे हैं, जहाँ जोड़े पारंपरिक ब्रज संस्कृति और आध्यात्मिक शांति के बीच ...और पढ़ें

वृंदावन में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए रिजार्ट्स में इस तरह की सजावट की गई है।
जागरण संवाददाता, मथुरा। वृंदावन के एक प्रमुख होटल पर पिछले दिनों जब दो दर्जन लग्जरी गाड़ियां और टूरिस्ट बस एक साथ आकर रुकी तो ब्रज में पधारो गीत, पुष्प वर्षा और बांसुरी वादकों ने अभिवादन किया। अंदर पहुंचे तो तुलसी की माला और चंदन से अभिनंदन हुआ। कमरों तक पहुंचाने की व्यवस्था में लगे वेटर भी राधे-राधे करते हुए साथ ले जा रहे थे।
कुछ विश्राम के बाद ब्रज के भोग लगे तो आयोजनों का सिलसिला आगे बढ़ा। हल्दी, मेहंदी की धूम मची तो वान्या और तुषार वैदिक मंत्रों के बीच जीवन भर के लिए एक-दूजे के हो गए। विदाई में सभी को माखन-मिश्री की पोटली और बांसुरी भेंट की गई।
ब्रज की रज से लगाव और प्रेम का संदेश देने वाले कान्हा के प्रति खिंचाव है कि युवा जोड़े, दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र की चकाचौंध को छोड़ खिंचे चले आ रहे हैं। ब्रज थीम पर सजावट और मयूर नृत्य के साथ महारास थीम पर संगीत संध्या सजाई जाती है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वैवाहिक गतिविधियां होती हैं। भोजन में राधारानी को भाने वाली अरबी का झोल तो मिठाई में देशभर में मशहूर पेड़ा दिया जाता है।
माखन-मिश्री के भोग से बारातियों का स्वागत तो मुरली के धुन सभी को लुभा रही होती है। एक-दूसरे का हाथ थामने के बाद जोड़े बांके बिहारी जी का आशीर्वाद लेकर नए जीवन की शुरुआत करते हैं।
डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए मथुरा-वृंदावन लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। वर्षभर में 500 से अधिक बाहर से आने वाले जोड़े यहां शादियां कर रहे हैं। इसमें पांच से 10 शादियां विदेशी मेहमानों की भी हो रही हैं। वेडिंग प्लानर सतीश सिंह बताते हैं कि ब्रज में डेस्टिनेशन वेडिंग का क्रेज तेजी से बढ़ा है।
कुछ वर्ष पहले तक 100 शादियां पूरे वर्ष में होती थीं, लेकिन अब ये आंकड़ा पांच से छह गुणा तक हो गया है। वर्षभर तक का प्लान तय हो जाता है। इवेंट कोआर्डिनेटर रमन बताते हैं कि देश ही नहीं विदेश से भी जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधने वृंदावन आ रहे हैं।
वह यहां की संस्कृति, और आध्यात्मिक शांति को पसंद करते हैं। अधिक रीति-रिवाज नहीं करते, लेकिन गोपी, ग्वाल की वेशभूषा में जयमाला जरूर करते हैं।
बांसुरी की धुन पर किया जाता है स्वागत
इवेंट कोआर्डिनेटर हेमंत बताते हैं कि ब्रज में शादियां करने आने वाले जोड़ों में वृद्धि हुई है। अब तो सहालग का कोई दिन खाली नहीं जाता है, बल्कि एक दिन में कई भी हो जाती हैं। महीनों पहले से पार्टियां थीम समझ कर अपनी मांग भी बता देती हैं। उनका स्पष्ट कहना होता है कि ब्रज का आनंद चाहिए। दोनों पक्ष का स्वागत बांसुरी की धुन पर होता है।
चार धाम, वृंदा आनंद और कई आश्रम कराते इंतजाम
छटीकरा स्थित चार धाम मंदिर में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए पूरे इंतजाम हैं। यहां 800 लोगों तक की शादी हो जाती है। यहां अगले एक वर्ष और उससे आगे की भी तारीखें तय हो जाती हैं। वृंदा आनंद में भी डेस्टिनेशन वेडिंग हो रही हैं। इसके साथ ही वृंदावन के कुछ आश्रम भी हैं जहां मंडप सजते हैं।
लोगों को खींच कर लाने वाले श्रीकृष्ण हैं। उनके प्रेम में अभिभूत होकर लोग आते हैं और यहां अपने जीवन के सपने सजाते हैं। भीड़ वाले शहरों के साथ ही प्राकृतिक सुंदरता वाले राज्यों से भी लोग आते हैं। कुछ विदेशी लोग भी वैवाहिक बंधन में बंधते हैं।
एकता अग्रवाल, वेडिंग प्लानर
श्रीजी, कान्हा जी की भूमि प्रेम का प्रतीक है। यहां दूसरे स्थानों से आकर शादी करने वालों की संख्या बढ़ी है। वर्षभर में 400 से 500 और इससे अधिक भी शादियां होती हैं। कुछ लोग सहालग की तिथियों से अलग भी शादियां करते हैं।
चिराग तोमर, वेडिंग प्लानर
